मल्टीमीडिया डेस्क। भगवान श्रीकृष्ण ने ज्येष्ठ पांडूपुत्र युधिष्ठिर से कहा था कि पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से मानव पापमुक्त हो जाता है और उसको पुण्यों की प्राप्ति होती है। इस व्रत के करने मात्र से मानव को श्रीहरी के लोक की प्राप्ति होती है। इस दिन अन्न, जल, छाता, तिल, भूमि, सोना और गाय का दान करने वाले मनुष्य के पास यमराज नहीं आते हैं। पापांकुशा एकादशी के व्रत को करने से मानव दीर्घायु होता है और विपुल धन-संपत्ति का मालिक होता है।

पापांकुशा एकादशी के व्रत की विधि

एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें। स्वच्छ होने के बाद आसन पर विराजित होकर व्रत का संकल्‍प लें। घर के पूजा स्‍थान पर एक कलश की स्‍थापना करें। कलश के ऊपर भगवान विष्‍णु की प्रतिमा या चित्र की स्थापना करें। स्थापित प्रतिमा या चित्र के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं, धूपबत्ती लगाएं। सुगंधित फूल, नारियल, मिष्ठान्न, ऋतुफल और तुलसी दल समर्पित करें। इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। पाठ करने के बाद श्रीहरी की आरती उतारें। संभव हो तो रात्रि जागरण करें और भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन करें।

द्वादशी के दिन ब्राह्मणभोज का आयोजन करें और उनको वस्त्र आदि के साथ यथोचित दक्षिणा देकर विदा करें। एकादशी व्रत करने वाले को दशमी तिथि से ही सात्विक तरीके से रहना चाहिए। दशमी तिथि से व्रत का पालन करना चाहिए। दशमी तिथि को सात तरह के अनाज गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर की दाल का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इन सात अनाजों की पूजा एकादशी के दिन की जाती है।

पापांकुशा एकादशी के इन यह रखें सावधानियां

एकादशा का उपवास करने पर सिर्फ एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करें। चावल और भारी खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। पापांकुशा एकादशी के दिन रात्रि पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन अपना व्यवहार संयमित रखें और क्रोध का त्याग करते हुए आचरण पर नियंत्रण रखें।

पापांकुशा एकादशी के शुभ मुहूर्त

इस बार पापांकुशा एकादशी अक्टूबर महीने में 9 तारीख, बुधवार को है।

एकादशी तिथि का प्रारंभ

आठ अक्‍टूबर 2019 को दोपहर दोबजकर पचास मिनट से।

एकादशी तिथि की समाप्‍ति

नौ अक्‍टूबर 2019 को शाम पांच बजकर उन्नीस मिनट पर।

द्वादशी तिथि के दिन पारण मुहूर्त

दस अक्‍टूबर 2019 को सुबह छह बजकर अठारह मिनट चालीस सेकेंड से सुबह आठ बजकर अड़तीस मिनट छब्बीस सेकेंड तक।

Posted By: Yogendra Sharma

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