मल्टीमीडिया डेस्क। साल 2019 में दो सूर्य ग्रहण देखने के बाद अब मौका है इस साल के दूसरे और आखिरी चंद्र ग्रहण को देखने का। इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 21 जनवरी को पड़ा था। चंद्र ग्रहण 16 और 17 जुलाई की मध्य रात 1.32 मिनट से शुरू होकर सुबह 4.30 मिनट तक रहेगा। यह खगोलीय घटना करीब 2 घंटे 58 मिनट तक देखी जा सकेगी।

खग्रास चंद्र ग्रहण आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में लग रहा है। 16 जुलाई को चंद्रग्रहण होने के कारण शहर के सभी प्रमुख मंदिरों के पट शाम को चार बजे सूतक लगने के कारण बंद हो जाएंगे। चंद्रग्रहण का सूतक नौ घंटे पहले और सूर्यग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले लगता है।

यह समय अशुभ माना जाता है। ग्रहण का सूतक काल 16 जुलाई शाम 4:25 से शुरु होकर सुबह 4:45 तक रहेगा। मंदिरों के पट दूसरे दिन बुधवार सुबह खुलेंगे। इस स्थिति में गुरु पूर्णिमा को होने वाले पूजन भी शाम चार बजे के पहले ही हो सकेंगे। इस बार 149 साल बाद एक विशेष संयोग बन रहा है।

149 साल बाद बना है दुर्लभ संयोग

गुरु पूर्णिमा के दिन ही चंद्र ग्रहण भी पड़ेगा। ग्रहों की दृष्टि से बात करें, तो 149 साल पहले की तरह ही इस बार भी शनि, केतु और चंद्र धनु राशि में बैठे होंगे। वहीं, राहु, सूर्य और शुक्र मिथुन राशि में बैठे होंगे। बताते चलें कि खगोल विज्ञान के अनुसार चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य जब एक सीध में होते हैं तब ग्रहण पड़ता है।

सूर्य और चंद्रमा के बीच जब पृथ्वी आ जाती है और चंद्रमा पर पृथ्वी छाया पड़ने लगती है, तो इसे चंद्र ग्रहण कहते हैं। इसे भारत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका सहित यूरोप के आस-पास में दिखाई देगा। एशियाई देशों में पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, सिंगापुर, फिलिपींस, मलेशिया और इंडोनेशिया के साथ ईरान, इराक, तुर्की और सऊदी अरब में भी इसे देखा जा सकेगा। एशिया के देशों में चांद का 65 फीसद हिस्सा ब्लड रेड कलर का दिखाई देगा।