Paush Purnima 2019: वैदिक संस्कृति में पूर्णिमा तिथि का बहुत महत्व बताया गया है। शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि पूर्णिमा होती है। चंद्रमा इस दिन आसमान में अपने पूर्ण आकार में होता है। पौष मास की पूर्णिमा दो दान-पुण्य और स्नान-ध्यान का बहुत महत्व है। उत्तर भारत में इस अवसर श्रद्धालु बड़ी संख्या में पवित्र नदी और सरोवरों में स्नान करते हैं और पुण्य की डुबकी लगाते हैं। मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय के पूर्व या सूर्योदय के समय स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। पूर्णिमा पर देव आराधना और दान से भी पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

पूर्णिमा तिथि

प्रारंभ - जनवरी 10, 2020 को 2 बजकर 36 मिनट से

समापन - जनवरी 11, 2020 को 12 बजकर 53 मिनट पर

पौष पूर्णिमा का महत्व

पौष मास को सूर्य देव का मास माना जाता है। इसलिए इस मास में पूर्णिमा तिथि से पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है। इस दिन सूर्य आराधना से बाधाओं का नाश होता है।

पौष पूर्णिमा व्रत और पूजा विधि

पौष पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पूर्व उठ जाएं। स्नान से पहले पूर्णिमा के व्रत का संकल्प लें। किसी पवित्र नदी, सरोवर या कुंड में स्नान करें। स्नान के बाद सूर्यमंत्रों का जाप करते हुए उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दें। इसके साथ ही भगवान लक्ष्मीनारायण की आराधना उनको फल, फूल, नैवेद्य अर्पित करें। किसी जरुरतमंद व्यक्ति या विद्वान ब्राह्मण को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दे। दान में तिल, गुड़, कंबल और ऊनी वस्त्र देने से विशेष लाभ होता है। पूर्णिमा तिथि को चंद्र की तिथि माना जाता है इसलिए इस दिन सूर्य और चंद्र दोनों देवों का फल प्राप्त होता है।

Posted By: Yogendra Sharma

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