उज्जैन। पुराणों में उज्जैन को मोक्षतीर्थ के रुप में जाना जाता है। यहां किसी भी व्यक्ति का अंतिम संस्कार करने के बाद उसकी आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए किये जाने वाले विधानों में उज्जैन का विशेष महत्व है। यह ऐसा तीर्थ है जहां मृतात्मा की आत्मा की शांति के लिए किए जाने वाले श्राद्ध कर्म का पुण्यफल प्राप्त होता है।यहां पर स्थित है पितृ मोक्ष तीर्थ गया कोठा।

गया कोठा प्राचीन अवंतिका नगरी के खाकचौक में स्थित है , मान्यता है कि पितरों की शांति और सद्गति के लिए इस स्थान पर किया गया पूजन, तर्पण, पिंडदान और अन्य कार्य शुभफलदायी है। यहां बड़े पैमाने पर श्रद्धालु दिवंगतों की शांति के लिए पूजन करवाते हैं।

श्राद्ध पक्ष के दौरान यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पूजन और तर्पण करने पहुंचते हैं। यह स्थान अतिप्राचीन है और यहां पर भगवान श्री विष्णु के 16 चरण प्रतिष्ठित हैं। भगवान के चे चरण श्राद्धपक्ष के 16 दिनों के प्रतीक हैं। मान्यता है कि भगवान श्री विष्णु के 16 चरणों पर दूध और जल से अभिषेक करने से श्रद्धालु को पुण्यफल प्राप्त होता है। यदि मृतात्मा के निमित्त यहां पूजन किया जाता है तो मृतात्मा की सद्गति होती है और वह विष्णु लोक को प्राप्त होता है।

यहां हुई थी फल्गु नदी प्रगट

मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण जब विद्या ग्रहण करने के लिए उज्जैन आए और लौटने से पहले उनकी भेंट गुरुमाता से हुई। उस दौरान गुरुमाता ने उन्हें अपने मृत पुत्रों को जीवित करने के लिए कहा था लेकिन श्री कृष्ण ने कहा था कि वे प्रकृति के नियम को तो नहीं तोड़ सकते हैं लेकिन इसके बाद उन्होंने गुरु पुत्रों को मोक्ष दिलवाने के उद्देश्य से उज्जैन के इसी स्थान पर बोध गया में बहने वाली नदी जिसे फल्गु के नाम से जाना जाता है। उसे प्रकट किया। जिसके बाद से यहां पर गुप्तरूप से फल्गु नदी का प्राकट्य माना जाता है।

जटेश्वर महादेव का मंदिर गया कोठा तीर्थ में प्रतिष्ठित है। यह 84 महादेव में से एक मंदिर है। मान्यता है कि इस शिवलिंग के दर्शन और पूजन करने वाले पर पितरों की कृपा होती है और वह शिवलोक को प्राप्त होता है।

जटेश्वर महादेव का मंदिर गया कोठा तीर्थ में प्रतिष्ठित है। यह 84 महादेव में से एक मंदिर है। मान्यता है कि इस शिवलिंग के दर्शन और पूजन करने वाले पर पितरों की कृपा होती है और वह शिवलोक को प्राप्त होता है।