हरिशंकर मिश्र, कुंभनगर। गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर सोमवार को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही कुंभ के पहले स्नान के लिए लोग दौड़ पड़े। मानों कोटि-कोटि देवताओं ने अमृत वर्षा कर दी हो। स्नान का क्रम लगातार बना हुआ है। मंगलवार को प्रातः छह बजकर बीस मिनट से अखाड़ों का शाही स्नान प्रारंभ होगा। इसे देखने के लिए पूरी दुनिया से श्रद्धालु पहुंचे हैं। नागाओं का यह स्नान पूरी दुनिया को चमत्कृत करता रहा है।

प्रथम स्नान पर्व पर मेला क्षेत्र में कड़े सुरक्षा इंतजाम हैं। प्रशासन का मानना है कि दो दिनों के भीतर लगभग दो करोड़ श्रद्धालु स्नान करेंगे। सोमवार को 55 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया। 35 सौ हेक्टेयर क्षेत्र में बसे तंबुओं के इस शहर में सोमवार की रात जीवंत हो उठी। चारों दिशाओं से श्रद्धालुओं का आना बना हुआ है।

कल्पवास हालांकि पौष पूर्णिंमा से शुरू होगा लेकिन वे यहां बस चुके हैं। इस बार कुंभ की दिव्यता से लोग चमत्कृत हैं। मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने कहा कि हमारे लिए यह शुभ घड़ी है। अखाड़ों में उत्साह का माहौल है। सोमवार को दिनभर सभी तेरह अखाड़ों में शाही स्नान की तैयारियां चलीं।

अखाड़ों के पीठाधीश्वरों के लिए रथ सजाए गए हैं। नागा भी अपने पूरे श्रृंगार के साथ बाहर निकलेंगे। किन्नर अखाड़ा की प्रमुख लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी इस बार की मुख्य आकर्षण हैं। वह और उनके अनुयायी सबसे बड़े जूना अखाड़े के साथ निकलेंगे। देश के अधिकांश बड़े संत यहां पहुंच चुके हैं।

श्रद्धालुओं के स्नान के लिए 35 घाट श्रद्धालुओं के स्नान के लिए 35 घाट सजाए गए हैं। संगम पर स्नान के विशेष इंतजाम किए गए हैं। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने सोमवार को सभी घाटों का निरीक्षण किया। किसी भी आपदा से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन टीम भी तैयार रहेगी।

शिविरों में प्रवचन की गूंज कुंभ क्षेत्र जीवंत हो उठा है। शिविरों में प्रवचन की गूंज है। पंडालों में सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हो गए हैं। रामचरित मानस की चौपाइयां गूंज रही हैं। राजा हर्ष की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए खिचड़ी से दान-धर्म का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा। सैकड़ों शिविरों से प्रसाद का वितरण शुरू हो गया है।

आश्रमों और अखाड़ों में अन्नपूर्णा विराजमान मंगलवार को सभी बड़े आश्रमों और अखाड़ों में अन्नपूर्णा विराजमान होकर भंडारे को आगे बढ़ाएंगी। पंडों ने भी अपने यजमानों के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। उनके यहां भी श्रद्धालुओं का वास है।

इस मास में स्नान के साथ ही दान का भी विधान

ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार, इस मास में स्नान के साथ ही दान का भी विधान है। शास्त्रों में कहा गया है कि 'माघे मासी महादेवः यः कुर्यात घृत कंबलम। सः भुक्तवा सकलान, भोगान अंते मोक्षम च विंदति॥' अर्थात - माघ मास में जो धर्म पारायण आमजन मानस विशेष कर घृत-कंबल का दान करता है, लोक में सर्व प्रकार के भोगों को भोग कर अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है। हालांकि, माघपर्यंत प्रयागराज में कल्पवास व स्नान-दान का विशेष महत्व है लेकिन काशी में भी इसके लिए श्रद्धालुओं की खूब जुटान होती है। कुंभ में स्नान के बाद अस्थावानों का पलट प्रवाह भी काशी की ही ओर उमड़ता है।

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