वाराणसी। दुनिया की प्राचीन धर्म नगरी के साथ ही जल तीर्थों में भी खास काशी में मकर संक्रांति से एक दिन पहले ही स्नान पर्व की रंगत निखरने लगी। तिथि विशेष से एक दिन पहले ही श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान, दान और पूजन अनुष्ठान कर इसका श्रीगणेश कर दिया। इनमें कुछ 14 जनवरी यानी मकर संक्रांति का मान के तहत स्नान करने वाले थे तो तमाम ऐसे रहे जिन्होंने तीर्थराज प्रयाग में कुंभ के प्रथम स्नान से पहले काशी में गंगा नहाकर पुण्य कामना की डुबकी का आरंभ किया।

वास्तव में सनातन धर्म में वैशाख, कार्तिक व माघ माह स्नान दान को समर्पित हैं। इनमें माघ का विशेष महत्व है, मकर संक्रांति अक्सर इसी माह में पड़ती है। इससे मास पर्यंत स्नान विधान वाले इस मास में पांच प्रमुख स्नानों का योग बनता है। इस बार मकर संक्रांति पौष मास में ही पड़ने से माघ में सिर्फ चार खास स्नान पर्व मिल पाएंगे।

ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार माघ मासपर्यंत स्नान दान का आरंभ 21 जनवरी को पौष पूर्णिमा से होगा जो माघ मास की पूर्णिमा तक चलेगा। पौष पूर्णिमा के अलावा मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी व माघी पूर्णिमा स्नान भी माघ मास के अंतर्गत ही आएंगे। इस मास में स्नान के साथ ही दान का भी विधान है। शास्त्रों में कहा गया है कि 'माघे मासी महादेवः यः कुर्यात घृत कंबलम। सः भुक्तवा सकलान, भोगान अंते मोक्षम च विंदति॥' अर्थात - माघ मास में जो धर्म पारायण आमजन मानस विशेष कर घृत-कंबल का दान करता है, लोक में सर्व प्रकार के भोगों को भोग कर अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है।

हालांकि माघपर्यंत प्रयागराज में कल्पवास व स्नान-दान का विशेष महत्व है लेकिन काशी में भी इसके लिए श्रद्धालुओं की खूब जुटान होती है। कुंभ में स्नान के बाद अस्थावानों का पलट प्रवाह भी काशी की ही ओर उमड़ता है।

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