28 साल बाद शनि महाराज 2 नवंबर की अर्धरात्रि 12.54 बजे तुला को छोड़कर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। इससे कई तरह के राजनीतिक, सामाजिक, प्राकृतिक परिवर्तन देखने को मिलेंगे। शतभिषा नक्षत्र एवं कुंभ राशिष्ठ चंद्रमा के समय न्याय के देवता शनिदेव वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे।

जो ढाई वर्ष तक इसी राशि में विचरण करेंगे। चूंकि शनि भूमि पुत्र मंगल की राशि वृश्चिक में जा रहे हैं अतः भूमि, सोना आदि लाल धातुओं, लाल वस्तुओं, पदार्थों के दामों में वृद्घि करेगा।

ज्योतिष मठ संस्था के संचालक पं. विनोद गौतम के अनुसार पूर्व में शनि का वृश्चिक राशि में प्रवेश 16 सितंबर 1985 में हुआ था। शनि के वृश्चिक राशि में प्रवेश के समय चक्रवाती हवाएं अपना प्रभाव उत्तरी पूर्वी स्थिति में बनाएंगी। जिससे कर्क रेखा के आसपास वर्षा के योग बनेंगे। कहीं कहीं भारी गरज चमक के साथ शीतलहर, ओला वृष्टि तथा भूमि में कंपन आदि प्राकृतिक प्रभाव भी प्रत्यक्ष देखने को मिलेगा। यानी नवंबर के पहले सप्ताह में वर्षा होगी।

राजनीति प्रभाव

राजनीतिक कारक मंगल की राशि में शनि का प्रभाव होगा। इससे राजनीतिक अस्थिरता देखने को मिलेगी। साथ ही कई जांच एजेंसियां भी जांच के दायरे में आएंगी।

न्यायपालिका होगी मजबूत

शनि के राशि परिवर्तन से आगामी ढाई सालों तक सेना, पुलिस, गोला बारूद आदि शक्तियों का भरपूर उपयोग होगा। सीमा तटीय क्षेत्रों में आतंकवाद में वृद्घि होगी। परंतु न्याय व्यवस्था में कसावट रहेगी। शनि के परिवर्तन से एक नए चमत्कारिक अविष्कार का पृथ्वी पर जन्म होगा।

साढ़ेसाती से मुक्त होगी कन्या राशि

60 साल से कन्या राशि में चल रही साढ़ेसाती का प्रभाव समाप्त हो जाएगा। जो कि आगामी 28 वर्ष बाद आएगा। शनि के राशि परिवर्तन से साढ़ेसाती का प्रभाव कन्या राशि को छोड़कर वृश्चिक राशि में होगा।

इन राशियों पर ढैय्या का प्रभाव

सिंह- इस राशि में ताम्रपाद का ढय्या रहेगा। जो अचानक धनलाभ, स्त्री पुत्र सुख, संपत्ति में लाभ, प्रगति के मार्ग प्रशस्त करेगा। सेहत अच्छी रहेगी।

मेष- इस राशि में ढय्या स्वर्णपाद का रहेगा। इन राशि वालों को निजीजनों से विरोध, गृह क्लेश, रोगों से परेशानी, अनावश्यक खर्च, धन हानि भय के योग रहेंगे।

तुला- इस राशि में साढ़ेसाती पैरों से उतरती हुई होगी। व्यापार में प्रगति, धन धान्य समृद्घि, सम्मान, मांगलिक कार्यों में सफलता दिलाएगी।

वृश्चिक- इस राशि की साढ़ेसाती हृदय में रहेगी। जिससे शारीरिक पीड़ा, रक्त पित्त विकार, स्त्री कष्ट, व्यापार हानि, वाहन भय रहेगा।

धनु- इसमें ताम्रपाद की साढ़ेसाती रहेगी जो मष्तक पर चढ़ते हुए होगी। शुरू में लाभ के योग बनाएगी। स्त्री पक्ष, पुत्र, संतान सुख, प्रगित, नए कार्य की शुरुआत होगी लेकिन स्वास्थ्य में रुकावट देगी।

(अन्य राशियों में शनि का प्रभाव सामान्य रहेगा।)

शनि की शांति

शनि के बीच मंत्र का जाप, दशान हवन, शनिवार को सात प्रकार के अनाजों का दान, लौह पात्र में तेल दान, शनि स्त्रोत का पाठ, हनुमान जी दर्शन, शनीचरी अमावस्या के दिन शनि शांति, शनि यंत्र धारण करना हितकर होगा।

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