Savan Maas 2020: भगवान महादेव की आराधना करने से भक्तों की मनोकामनाएं सरलता के पूरी हो जाती है। महादेव औघड़दानी है, कैलाशपति है और ब्रह्माण्ड के स्वामी होने के साथ कल्याण और विनाश दोनों के देवता है। इनको प्रसन्न करने के कई मंत्रों का वर्णन शास्त्रों में मिलता है। इन मंत्रों को शास्त्रोक्त उच्चारण से महादेव प्रसन्न होते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

लेकिन शास्त्रों में एक शिव मंत्र भी है जिसके जाप के बगैर कोई भी कर्मकाण्ड या पूजा-पाठ पूर्ण नहीं होता है। वैसे तो सभी देवी-देवताओं के मंत्र अलग-अलग होते हैं, लेकिन जब भी आरती का समापन होता है एक शिवमंत्र को विशेष रूप से बोला जाता है। यह मंत्र है -

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।

मान्यता है कि इस मंत्र से शिव-पार्वती विवाह के समय भगवान विष्णु ने उनकी स्तुति की थी। इसलिए इस मंत्र के माध्यम से महादेव की स्तुति की जाती है। इसका अर्थ इस प्रकार है।

कर्पूरगौरं- कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले।

करुणावतारं- करुणा के जो साक्षात अवतार हैं।

संसारसारं- समस्त सृष्टि के जो सार हैं।

भुजगेंद्रहारम्- जो सांप को हार के रूप में धारण करते हैं।

सदा वसतं हृदयाविन्दे भवंभावनी सहितं नमामि- जो शिव, पार्वती के साथ सदैव मेरे हृदय में निवास करते हैं, उनको मेरा नमन है।

इस तरह से इस शिवमंत्र का संपूर्ण अर्थ इस प्रकार है।

जो कर्पूर जैसे गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, वे भगवान शिव माता भवानी सहित मेरे ह्रदय में सदैव निवास करें और उन्हें मेरा नमन है।

Posted By: Yogendra Sharma

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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