मल्टीमीडिया डेस्क। शिव शंभू को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए देवी पार्वती को कड़ी साधना और कई जतन करने पड़े थे। इसके बाद भोलेनाथ ने उनका निवेदन स्वीकार कर उनको अर्द्धांगिनी के रूप में अपनाया था। दानवों और राक्षसों ने भी महादेव की आराधना कर उनसे मनवांछित वर की प्राप्ति की थी।लेकिन कलयुग में मानव कई तरह से, सहज-सरल तरीके से भगवान शिव की आराधना कर उनकी कृपा प्राप्त कर सकता है।

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।

नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय ॥

जो शिव नागराज वासुकि का हार पहिने हुए हैं, तीन नेत्रों वाले हैं, तथा भस्म की राख को सारे शरीर में लगाये हुए हैं, इस प्रकार महान् ऐश्वर्य सम्पन्न वे शिव नित्य–अविनाशी तथा शुभ हैं। दिशायें जिनके लिए वस्त्रों का कार्य करती हैं, अर्थात् वस्त्र आदि उपाधि से भी जो रहित हैं; ऐसे निरवच्छिन्न उस नकार स्वरूप शिव को मैं नमस्कार करता हूँ।

शिव पंचाक्षरी मंत्र 'नम: शिवाय' मंत्रों में संजीवनी बूटी की तरह है इस मंत्र के श्रद्धापूर्वक जाप करने से मानव के कई जन्मों के पापों का नाश हो जाता है। वह इहलोक में पुत्र, धन, संपदा और सभी भौतिक सुखों को प्राप्त कर परलोकवासी होने पर कैलाशपति शिव के चरणों में निवास करता है। शिव पंचाक्षरी मंत्र 'नम: शिवाय' का जाप अलग-अलग स्थानों पर विधिपूर्वक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

गंगा, यमुना आदि पवित्र नदियों पर पंचाक्षर मन्त्र का एक लाख जप करने और दुर्वांकुरों, तिल व गिलोय का दस हजार हवन करने से मानव दीर्घायु होता है।

शनिवार को पीपलवृक्ष का स्पर्श कर पंचाक्षर मन्त्र का जप करने से अकालमृत्यु का भय दूर होता है।

चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के समय समर्पित भाव से भोलेनाथ के समीप दस हजार जप करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

अंजलि में जल लेकर शिव का ध्यान करते हुए ग्यारह बार पंचाक्षर मन्त्र का जप करके उस जल से शिवजी का अभिषेक करने से अपार विद्या और लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।

एक सौ आठ बार पंचाक्षर मन्त्र का जप करके स्नान करने से सभी तीर्थों में स्नान का फल मिलता है।

रोजाना एक सौ आठ बार पंचाक्षर मन्त्र का जप करके सूर्य के समक्ष जल पीने से सभी उदर रोगों का नाश हो जाता है।

भोजन से पहले ग्यारह बार पंचाक्षर मन्त्र के जप से भोजन भी अमृत के समान हो जाता है।

पंचाक्षर मन्त्र का एक लाख जप करने और नित्य १०८ आक की समिधा से हवन करने से असाध्य रोग से मुक्ति मिल जाती है।

महादेव बिलपत्र, भांग, धतूरा और सिर्फ एक लोटा जल के समर्पण से खुश हो जाते हैं। महादेव ने देवी पार्वती से कहा है कि कलिकाल में मेरी पंचाक्षरी विद्या का आश्रय लेने से मनुष्य संसार-बंधन से मुक्त हो जाता है। मैंने बारम्बार प्रतिज्ञापूर्वक यह बात कही है कि यदि पतित, निर्दयी, कुटिल, पातकी मनुष्य भी मुझमें मन लगा कर मेरे पंचाक्षर मन्त्र का जप करेंगे तो वह उनको संसार-भय से तारने वाला होगा।

योगेंद्र शर्मा

Posted By: Yogendra Sharma

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