मल्टीमीडिया डेस्क। शिवपूजन के विभिन्न विधि-विधानों का पौराणिक शास्त्रों में वर्णन किया गया है। शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार शिव आराधना करने से महादेव पूजा का पूरा लाभ मिलता है और भोलेनाथ शिवभक्त पर प्रसन्न होकर आशीषों की बरसात करते हैं। शास्त्रों में अनेक तरीकों से शिवपूजा का विधान बताया गया है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार शिवपूजा करते हैं और भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करते हैं।

आश्विन मास में करें गोमेद शिवलिंग की पूजा

लिंगपुराण के अनुसार शिवलिंग का साल के सभी महीनों में पूजा का विधान है और किस शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए इसका वर्णन किया गया है। चैत्र महीने में सोने के शिवलिंग की पूजा करना चाहिए। वैशाख में वज्र यानी हीरे के शिवलिगं की पूजा का विधान है। ज्येष्ठ महीने में मर्कत मणि से बने शिवलिंग की पूजा करना चाहिए। आषाड़ महीने में मुक्ता मणि से बने शिवलिंग की पूजा करना चाहिए। सावन में नील मणि निर्मित शिवलिंग की पूजा का प्रावधान है। भादो में पद्मराग के शिवलिंग की पूजा का प्रावधान है। आश्विन मास में गोमेद के शिवलिंग की पूजा करना चाहिए।

कार्तिक महीने में प्रवाल से बने शिवलिंग की पूजा का प्रावधान है। मार्गशीर्ष में वैदूर्य से बने शिवलिंग की पूजा का विधान है। पूष में पद्मराग से बने शिवलिंग की पूजा करना चाहिए। माघ में सूर्यकांत मणि के शिवलिंग की पूजा करना चाहि्ए। फागुन में स्फटिक मणि के शिवलिंग के पूजा का विधान है। सभी महीनों में सोने का कमल बनाने या चांदी के कमल से या सिर्फ कमल से पूजा करने का विधान है।

पद्म में है महादेव का निवास

रत्न ना हो तो सोने-चांदी और सोने-चांदी के अभाव में तांबे और लोहे से या पत्थर की लकड़ी की या मिट्टी की सुगंधित शिवमूर्ति बना लेना चाहिए। हेमन्त ऋतु में शिवजी की बेलपत्र से पूजा करें। सभी महीनों में चांदी का कमल जिसमें सोने की कली बनी हो , इस तररह के कमल से पूजा करें। इनके अभाव में बेलपत्र से पूजा करें। बेलपत्र में सदा देवी लक्ष्मी का निवास रहता है। नीलकमल में अम्बिका, उत्पल में षडमुख और महादेव पद्म में रहते हैं।

श्रीपत्र का कभी त्याग नहीं करना चाहिए। गूगल की धूप सर्वपापों का नाश करती है इसलिए धूप-दीप सदैव अर्पण करना चाहिए। चंदन को सर्वरोगों का नाश करने वाला और सर्वसिद्धीदाता कहा जाता है इसलिए इसका लेपन करना चाहिए। श्वेत आक में ब्रह्मा का वास है। कनेर में साक्षात मेधा, करवीर में गणाध्यक्ष, वक्र में नारायण और सर्वसुगंधित फूलों में गंगा निवास करती है।

योगेंद्र शर्मा

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