Sharad Purnima 2020 : इस बार शरद पूर्णिमा कई दुर्लभ संयोगों एवं महत्‍वपूर्ण योग के साथ आ रही है। इस वर्ष शुक्रवार प्रदोष काल में निशा काल ( मध्य रात्रि) मे पूर्ण पूर्णिमा तिथि व्यापत होने से शरद पूर्णिमा का पर्व होगा। शनिवार को प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि है पर पर्व शुक्रवार को होगा। धर्माचार्यों के अनुसार इस बार शरद पूर्णिमा के योग में महालक्ष्मी जी का पूजन वैभवता का योग है। शुक्रवार को ही राजराजेश्वरी महालक्ष्मी जी का व इंद्र देव की पूजा करके रात्रि जागरण किया जाता है। इसे ही कोजागरी व्रत कहा जाता है। जो लोग स्थिर लक्ष्मी व सुख समृद्धि वैभव की कामना करते हैं उन्हें शरद पूर्णिमा को महा लक्ष्मी जी का पूजन व इंद्र देव की पूजा पूर्ण शास्त्रोक्त क्रिया से करना चाहिए। सभी मनोकामनाएं को पूर्ण हैतु को प्रदोष काल में पूजा करें। रात भर जागरण करें, पूजा पाठ अभिषेक अर्चना आरती करें। लक्ष्मी जी रात्रि मे पृथ्वी पर भ्रमण करती है जो जागरण करता है उसे स्थिर लक्ष्मी , सुख समृद्धि सौभाग्य संतान सुख का आशीर्वाद देती हैं। जब पूर्णिमा तिथि प्रदोष काल में निशा काल ( मध्य रात्रि) में आश्विन मास की पूर्णिमा में हो तो कोजागरी व्रत होता है। सिर्फ पूर्णिमा निशिथव्यापनि मध्य रात्रि में ही हो तो शरद पूर्णिमा व्रत दूसरे दिन प्रदोष काल मे होगी। इसे ही शरद पूर्णिमा भी कहते हैं। जानिये इससे जुड़ी खास बातें।

- पूर्णिमा तिथि--- दोनों दिवस में मनाई जाएगी।

- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ-- 30-10-20 शुक्रवार शाम 5-45 मिनट से आरंभ होगी।

- पूर्णिमा तिथि पूर्ण--31-10-20 शनिवार रात्रि 8-18 तक चलेगी।

- शरद पूर्णिमा का पर्व -- 30-10-20 शुक्रवार

- कोजागर व्रत की पूर्णिमा - व्रत की पूर्णिमा- कोमुद्री व्रत

- रूके धन से, ऋण से, भूमि भवन उलझन से जो परेशान हैं व नूतन भूमि भवन लाभ के लिए, उघोग व्यापार प्रगति के रोग निवारण के लिए

- सभी को शरद पूर्णिमा पर राजराजेश्वरी भगवती महालक्ष्मी का अनुष्ठान करना चहिए। निश्चित आपके कार्य सिद्ध होंगे इसमे कोई संशय नहीं है।

- मंदिर में देवालयों मे तीर्थ मे पवित्र नदी के तटों पर गोशाला घी या तिल तेल के 108 या 1100 दीपक लगाएं।

- आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। भगवान श्रीकृष्ण जी गीता में कहते हैं ---

‘पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः।।

अर्थात रसस्वरूप अमृतमय चन्द्रमा होकर सम्पूर्ण औषधियों को अर्थात वनस्पतियों को पुष्ट करता हूं।

- रात्रि में चंद देव अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होकर अमृत वर्षा करते हैं। वह वर्षा अमृत के रूप मे आपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर रोशनी से करते हैं।

- चंद्र देव के उदय होने पर प्रणाम करके पूजा करें। फिर 16 नामों से पूजा करें।

ऊँ हिमांश्वे नमः ,सोमचंद्रया नमः चंद्रया नमः ,विधवे नमः ,कुमदनन्धवे नमः ,सोमाय नमः ,सुधांश्वे

नमः ,ओषधिशाय नमः ,अठजाय नमः ,मृगकाय नमः ,कलानिधये नमः ,नक्षत्र प्रियायै नमः, जापाय नमः ,

शर्वरी पतये नमः ,जैवातृकाय नमःचंद्रमसे नमः

इन 16 नामों को पढ़कर चांदी के कलश में या शंख में सफेद पुष्प अक्षत, दुर्वा , केशर ,सुपारी, दूध, जल, दक्षिणा के साथ चंद्र देव कोअर्घ्य इस मंत्र के साथ दें।

नमस्ते मास मासान्ते ,जायमान पुनः पुनः ।

गृहाणाअर्घ श्शांक त्वं. , रोहिण्या सहितो मम्।।

रात्रि में चंद्रमा की रोशनी से औषधियों का संचय करें।

- सुबह के समय पुनः महा लक्ष्मी जी का पूजन व इंद्र देव की पूजा करके कन्या ब्राह्मण को भोजन प्रसादी करके स्वयं पारणा करना चाहिए।

- शुभ योग देखिये दोनों दिवस चंद्रोदय मे पूर्णिमा तिथि है।

- सूर्य उदयात पूर्णिमा 31-10-20 भी महापर्व पूर्णिमा का है हमें पूर्ण दिनमान में सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूर्णिमा तिथि प्राप्त हो रही है।

- तीर्थ स्नान तर्पण पूजन हवन गौ सेवा करने का महापर्व है। श्राद्ध की पूर्णिमा शनिवार को है।

- कार्तिक मास का व्रत प्रारंभ स्नान शनिवार को होगा। गंगा स्नान का महापर्व है। लक्ष्मी नारायण जी के पूजन का विशेष योग।

- शनिवार पूर्णिमा के योग मे अपने इष्ट की या हनुमान जी महाराज का पूजा अभिषेक चोला श्रृंगार भोग आरती करें।

- आप जो अनुष्ठान करना चाहते हैं अवश्य करें। भगवान राधा दामोदर का महोत्सव करें।

आश्विनपौर्णमास्यां कोजागर व्रतम्।

केचित्पूर्वदिने निशीथव्याप्तिमेव परदिने

प्रदोषव्याप्तिरेव तदा परेत्याहुः।।

निशीथे वरदा लक्ष्मी: को जागर्तिति भाषिणी।

जगाति भ्रमते तस्यां लोकचेष्टावलोकिनी।

तस्मै वित्तं प्रयच्छामि यो जागर्ति महीतले।

(उक्‍त जानकारी प्राचीन हनुमान मंदिर मुकेरीपुरा इंदौर के पुजारी पंडित राजाराम शर्मा से चर्चा के अनुसार)

Posted By: Navodit Saktawat

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