भोपाल। नवरात्र के पहले दिन रविवार सुबह से देवी मंदिरों में माता के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ लग गई। मैहर में मां शारदा देवी के मंदिर में सुबह महाआरती हुई। इसके साथ ही माता का महाश्रृंगार किया गया। उधर रतलाम के कालका माता मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ लगी है। इस दौरान महिलाओं ने मंदिर परिसर में गरबा भी खेला और मां की आराधना की। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां सुबह के समय 4 से 6 बजे की बीच ही गरबे होते हैं। गरबे के लिए महिलाएं तैयार होकर रात 3 बजे ही मंदिर में आना शुरू हो जाती है। पुलिस प्रशासन की ओर से यहां व्यवस्था की गई है।

देवास की माता टेकरी पर नवरात्र में उमड़े श्रद्धालु

मध्यप्रदेश के देवास शहर में नवरात्र में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु माता की टेकरी पर दर्शन करने पहुंचेंगे। इसके लिए प्रशासन ने व्यवस्थाएं करना शुरू कर दी है। टेकरी पर स्थित तुलजा भवानी और चामुंडा माता में श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा है। मान्यता है कि यहां मांगी जाने वाली हर मुराद माताजी पूरी करती है। लगभग 300 फीट की ऊंचाई पर मां तुलजा भवानी और चामुंडा माता मंदिर है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दोनों बहनें है और एक बार मतभेद के चलते चामुंडा माता रूठ कर जाने लगी थी और कुछ दूर चलने के बाद वे फिर से रूक गई।

यहां भैरवनाथ, मां कालका, खो-खो माता, गणेशजी और हनुमानजी के मंदिर भी बनाए गए है। यहां आसपास के जिलों के साथ ही देशभर से श्रद्धालु पहुंचते है। बडी संख्या में श्रद्धालु नंगे पैर भी आते है। पुजारियों के मुताबिक यह मंदिर लगभग राजा विक्रमादित्य के समय से पहचाना जाने लगा। मंदिर का इतिहास करीब 350 साल से पुराना बताया जाता है। समय के साथ मंदिर का विस्तार होता जा रहा है।

भक्तों की मनोकामना पूरी करतीं हैं मां बगलामुखी

जबलपुर शहर के मध्य सिविक सेंटर स्थित मां बगलामुखी सिद्धपीठ मंदिर का भूमिपूजन 18 जुलाई 1999 को हुआ और 7 फरवरी 2000 को षंकरचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने मां पीतांबरा की स्थापना की। इसके दूसरे दिन ही शंकराचार्य आश्रम का शुभारंभ हुआ। शत्रु संहारक मां बगलामुखी के दर्शन करने शहर के अलावा अन्य शहरों से भी भक्त पहुंचते हैं। नौ दिन यहां मेला भरता है। नवरात्र पर्व पर पुजारी ब्रह्मचारी चैतन्यानंद महाराज द्वारा विशेष पूजन किया जाता है। प्रतिदिन रात 9 बजे मां भगवती की महाआरती की जाती है। प्रतिपदा को मंदिर में 1100 मनोकामना अखंड ज्योत की स्थापना की जाती है। हालांकि 1973 से पहले से यहां संस्कृत विद्यालय संचालित हो रहा है।

बड़ी खेरमाई मंदिर, भानतलैया

जबलपुर शहर के भानतलैया स्थित बड़ी खेरमाई मंदिर का प्राचीन इतिहास है। लगभग 800 वर्षों से यहां मातारानी का पूजन किया जा रहा है। मंदिर में पहले प्राचीन प्रतिमा शिला के रूप में थी जो वर्तमान प्रतिमा के नीचे के भाग में स्थापित है। मंदिर में प्रतिमा कल्चुरिकालीन है। मंदिर के पुजारी सुशील तिवारी ने बताया कि एक बार गोंड राजा मदनशाह मुगल सेनाओं से परास्त होकर यहां खेरमाई मां की शिला के पास बैठ गए। तब पूजा के बाद उनमें नया शक्ति संचार हुआ और राजा ने मुगल सेना पर आक्रमण कर उन्हें परास्त किया। 500 वर्ष पूर्व गोंड राजा संग्रामशाह ने मढ़िया की स्थापना कराई थी। पहले के समय में गांव-खेड़ा की भाषा प्रचलित थी। पूरा क्षेत्र गांव के जैसे था। खेड़ा से इसका नाम धीरे-धीरे खेरमाई प्रचलित हो गया। शहर अब महानगर हो गया है लेकिन आज भी मां खेरमाई का ग्राम देवी के रूप में पूजन किया जाता है।

मां शारदा करती हैं इच्छा की पूर्ति

मां शारदा शक्तिपीठासन के प्रधान पुजारी देवी प्रसाद महाराज हैं। इनका कहना है कि मां के दर्शनार्थ पधारे श्रद्धालुजन को इस स्थान पर विद्या, धन, संतान संबंधी इच्छाओं की पूर्ति होती है। लेकिन इस स्थान का उपयोग किसी अनिष्ट संकल्प के लिए नहीं किया जा सकता। ऐसी मान्यता है कि माता वैष्णवी है तथा सात्विक शारदा सरस्वती का साक्षात स्वरूप हैं। जो अध्यात्मिक क्षेत्र में बुद्धि, विद्या व ज्ञान की प्रदायनी देवी मानी जाती है। मां शारदा मंदिर पिरामिड आकार की पहाड़ी पर स्थित है। जहां पहुंचने के लिए 1052 सीढ़ियां निर्मित हैं। पहाड़ी की ऊंचाई लगभग 557 फीट है।

अनन्य भक्त थे आल्हा

मां के अनन्य भक्त महोबा के महापराक्रमी सेनापति आल्हा का अखाड़ा भी मां शारदा मंदिर पहाड़ी के समीप स्थित है। ऐसी मान्यता है कि घोर कलयुग में भी मां शारदा द्वारा आल्हा की भक्ति तथा तपस्या से प्रसन्न् हो उन्हें अमरत्व प्रदान किया गया। मां शारदा मंदिर प्रांगण में स्थित फूलमती माता का मंदिर आल्हा की कुल देवी का है। जहां विश्वास किया जाता है कि प्रतिदिवस ब्रह्म मुहूर्त में स्वयं आल्हा द्वारा मां की पूजा अर्चना की जाती है। मां शारदा मंदिर के उत्तर दिशा में एक किलोमीटर में आल्हा अखाड़ा स्थित है। जहां पर परमवीर आल्हा का भव्य मंदिर, शिव जी का प्राचीन मंदिर, नव ग्रह वाटिका व नक्षत्र उद्यान व आल्हा ताल है। मंदिर समिति द्वारा दर्शनार्थियों के हितार्थ यहां पर एक धर्मशाला का भी निर्माण कराया गया है। समिति द्वारा यहां पर मंदिरों की सेवा का कार्य डॉ. बाबा रामगोपालदास को दिया गया है।