संजय पांडे, सागर/ बांदरी। Shardiya Navratri 2020 । जरुआखेड़ा के पास स्थित हनौता परीक्षित गांव में बुंदेलखंड का संभवत: एक मात्र ऐसा मंदिर है, जहां मां अंजनी अपने पुत्र हनुमानजी के साथ विराजीं हैं। सुरम्य पहाड़ियों की तलहटी से घिरे इस मंदिर में होने वाले चमत्कारों से क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति अंजान नहीं है। इसकी ख्याति दूर-दूर तक है। नवरात्र के दौरान यहां शक्ति की उपासना के विशेष आयोजन हो रहे हैं।

स्थानीय व क्षेत्रीय लोगों के मुताबिक यह प्रतिमाएं अति प्राचीन व विलक्षण हैं। नवरात्र आते ही मां अंजनी के दरबार में चहल-पहल बढ़ जाती है। भक्तों का भी विश्वास है कि यहां आने के बाद असीम आत्मबल मिलता है। आज जिस तरह से महामारी फैली है, ऐसे में प्रभु हनुमानजी का सुमिरन आत्मबल प्रदान करता है। इस बीमारी का एक ही इलाज है इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत रखना, ऐसे में प्रभु हनुमानजी के नाम का सुमरिन आत्मबल देने वाला है। हनुमान जी के साथ जहां मां अंजनी स्वयं विराजमान हो, वहां भय, शोक, चिंता कैसे रह सकती है।

नवरात्र आते ही मां अंजनी के दरबार में बढ़ी चहल-पहल

मां अंजनी के मंदिर पर पहुंचने के लिए बांदरी से जरुआखेड़ा मार्ग तथा सागर-खुरई मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। यहां स्थित मंदिर पूरे बुंदेलखंड का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां भगवान हनुमानजी मां अंजनी के साथ विराजे हुए हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी बताते हैं कि हनौता परीक्षित गांव में स्थित हनुमानजी मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को कष्टों से भी मुक्ति मिलती है।

श्रद्धालुओं ने भी बताया कि जिले का एकमात्र मां अंजनी का दरबार भक्तों की आस्था का केन्द्र है। ऐसा मंदिर जिले में और कहीं नहीं है। यहां आने के बाद श्रद्धालुओं को असीम शांति मिलती है और बड़े से बड़ा कष्ट सहज ही दूर होने लगता है।

Posted By: Sandeep Chourey

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