मल्‍टीमीडिया डेस्‍क। शुक्रवार को कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी का पर्व देश भर में धार्मिक उल्‍लास के साथ मनाया जाएगा। यह हिंदू धर्म के मुख्‍य पर्वों में से एक है। भारत के अलावा, विदेशा में भी इसे मनाए जाने की धूम रहती है। आइये जानते हैं इसके बारे में कुछ महत्‍वपूर्ण मान्‍यताएं।

जन्‍माष्‍टमी के व्रत का समय

वैसे तो जन्‍माष्‍टमी के व्रत के समय पर कोई मतभेद नहीं है लेकिन फिर भी कुछ लोग मध्‍यरात्रि पर रोहिणी नक्षत्र होने पर व्रत रखते हैं जो कि सप्‍तमी एवं अष्‍मी का व्रत कहलाता है।

अर्धरात्रि के व्रत की है मान्‍यता

शास्‍त्रों के जानकारों ने व्रत या पूजन के लिए अर्धरात्रि के व्रत को ही मान्‍यता प्रदान की है। उत्‍तर भारत में स्‍मार्त लोग इसी का पालन करते हैं। यहां हरियाणा, चंडीगढ़, हिमाचल और पंजाब आदि राज्‍यों में अर्धरात्रि की अष्‍टमी से ही व्रत का आरंभ किया जाता है एवं पूजा की जाती है।

यहां उदयकालीन अष्‍टमी का आयोजन

उत्‍तर भारत में मुख्‍य रूप से उत्‍तर प्रदेश में उदयकालीन अष्‍टमी के दिन कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी मनाई जाती रही है। कृष्‍ण भक्ति से जुड़े मथुरा, वृंदावन आदि क्षेत्रों में इसी उदयकालीन अष्‍टमी का चलन रहा है। चूंकि मथुरा कृष्‍ण की जन्‍मस्‍थलीहहै, इसलिए केंद्र सरकार पर जन्‍माष्‍टमी के दिन वहां अवकाश घोषित करती है। यहां पर वैष्‍णव समाजी लोग उदयकालीन नवमी के दिन अष्‍टमी का व्रत रखते हैं।

यह है व्रत की विधि

सुबह स्‍नान के पश्‍चात ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्रोच्‍चार करना चाहिये। व्रत रखने वाले पूरे दिन के लिए फलाहार कर सकते हैं। रात में 12 बजे के समय अभिजीत मुहूर्त आता है। इस समय भगवान की आरती कर सकते हैं। खीरे को फोड़ने के बाद शंख बजाकर जन्‍म का उत्‍सव मनाया जाता है। इसके बाद मक्‍खन, मिश्री, पंजीरी, केला या मिठाई का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। इसके ठीक अगले दिन नंदोत्‍सव मनाया जाता है।

जन्‍माष्‍टमी के शुभ मुहूर्त

अष्‍टमी तिथि प्रारंभ: 23 अगस्‍त 2019 को सुबह 08 बजकर 09 मिनट से।

अष्‍टमी तिथि समाप्‍त: 24 अगस्‍त 2019 को सुबह 08 बजकर 32 मिनट तक।

रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 24 अगस्‍त 2019 की सुबह 03 बजकर 48 मिनट से।

रोहिणी नक्षत्र समाप्‍त: 25 अगस्‍त 2019 को सुबह 04 बजकर 17 मिनट तक।