मल्टीमीडिया डेस्क। शास्त्रों में शुक्र प्रदोष की महिमा का काफी गुणगान किया गया है। हर महीने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत करने का विधान है। प्रदोष व्रत में भगवान शिव की आराधना शाम के समय सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है। महादेव की शाम के समय की गई पूजा से कई समस्याओं का निवारण होता है और सुख-समृद्धि मिलती है। शुक्र प्रदोष के व्रत से दांपत्य जीवन से जुड़ी समस्याओं का अंत होता है और रिश्तों में मधुरता आती है। इसके साथ ही मधुमेह और आंखों के रोग में भी आराम मिलता है।

शुक्र प्रदोष के उपाय

दाम्पत्य जीवन में आई दिक्कतों को दूर करने के लिए पति-पत्नी दोनों मिलकर ग्यारह लाल गुलाब के फूलों को गुलाबी धागे में पिरोकर संध्या के समय शिवलिंग पर ओम नम: शिवाय का जाप सत्ताइस बार करते हुए समर्पित करें। रिश्तों में मिठास आएगी। जीवन में ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए शिव मंदिर में सुगंधित तेल के तेरह दीपक जलाएं। एश्वर्य की प्राप्ति होगी। अखंड सौभाग्य के लिए इत्र मिले घी का दीपक शिव मंदिर में जलाएं। अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होगी। सभी सुखों की प्राप्ति के लिए तेरह गुलाब के फूल शिवलिंग पर समर्पित करें।

शुक्र प्रदोष को यह सावधानियां बरते

शुक्र प्रदोष के दिन घर आई सभी स्त्रियों का सम्मान करें। उनको मिठाई खिलाने के साथ जलपान करवाएं। इस दिन घर और घर के मंदिर में साफ सफाई करके पूजन करें तो प्रदोष व्रत का पूरा फल मिलेगा। शिव पूजा में सफेद वस्त्र धारण करें। काले वस्त्र भूलकर भी ना पहने। सात्विक विचार मन में रखें यानी व्रत वाले दिन विचारों की शुद्धता का खास ख्याल रखें। अपने गुरु और पिता का सम्मान करते हुए उनका ख्याल रखें। इस दिन व्रत में तरल पदार्थों खासकर जल का ज्यादा सेवन करें। भविष्योत्तर पुराण के अनुसार त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव है। इस दिन सभी दिव्यात्माएं अपने सूक्ष्म स्वरूप में शिवलिंग में समा जाती है इसलिए प्रदोष के दिन शाम के समय शिवपूजा का विशेष विधान है।