नागदा। सूर्य की उपासना का अनूठा पर्व छठ शनिवार को नगर में मनाया गया। पूर्वांचलवासियों का जनसैलाब चंबल तट पर पहुंचा। दूसरी ओर दिनभर सूर्य देवता बादलों की ओट में ही छिपे रहे। इंद्रदेवता ने उपासकों की अगवानी हल्की बूंदाबांदी से की। पर्व को लेकर बच्चों सहित बड़ों में काफी उत्साह देखा गया। महिलाएं एवं युवतियां सोलह श्रृंगार कर चंबल तट स्थित घाट पर पहुंची। नदी में उतरकर बांस की टोकरी में पारंपरिक व्यंजन, फल, सब्जी अर्पित कर पूजाअर्चना की। इसके पश्चात डूबते सूर्य अर्घ्य देकर पुत्र सहित परिवार की सुखसमृद्धि की कामना।

मान्यता है कि सूर्यदेव की कृपा से सेहत अच्छी रहती है। घर में धन-धान्य की प्राप्ति होती है। संतान प्राप्ति के लिए छठ पूजन का विशेष महत्व है। शनिवार को घाटों पर गन्ने की झोपड़ी बनाकर महिलाओं छठ पूजन किया और इसके पश्चात् नदी में उतरकर बांस की टोकरी में पारंपरिक व्यंजन, फल, सब्जी अर्पित कर पूजन कर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। वहीं घाट पर परिवारजनों ने आतिशबाजी कर पर्व की खुशियां मनाई और रात में सपरिवार लोगों ने भोजन किया। 10 हजार से अधिक परिवार औद्योगिक शहर नागदा में लगभग 10 हजार पूर्वांचलवासी परिवार निवास करते हैं। मालावा क्षेत्र में पूर्वांचलवासियों की सबसे अधिक संख्या नागदा में है। छठ पर्व को लेकर प्रशासन ने चंबल नदी के तीनों घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था कर रखी थी। मुख्य रूप से दो घाट पर पूजन हुआ। सबसे अधिक भीड़ नायन डेम स्थित अयोध्याधाम आश्रम घाट पर थी। इसी प्रकार हनुमान डेम स्थित घाट पर भी बड़ी संख्या में पूर्वांचालवासियों ने पूजन किया। वहीं मेहतवास घाट पर भी पूजन हुआ।

दिनभर रुक-रुककर होती रही बूंदाबांदी शनिवार को दिन भर सूर्य देवता बादलों की ओट में छिपे रहे। इस दौरान दिनभर रुक रुककर हल्की बूंदाबांदी होती रही। बादलों की ओट में सूर्य देवता के छिपे रहने से उपासक महिलाओं ने दीपक को सूर्य का प्रतिकात्मक रूप मानते हुए सूर्यास्त के समय को साक्षी मानते हुए अर्घ्य देते हुए शाम का पूजन पूरा किया।

Posted By: Yogendra Sharma

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