साल 2021 का पहला चंद्रग्रहण 26 मई के दिन होगा। हालांकि, उपछाया चंद्रग्रहण होने के कारण इस दिन सूतक काल मान्य नहीं होगा। इस वजह से चंद्रग्रहण के मौके पर आपको किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी ना ही किसी पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। आमतौर पर चंद्रग्रहण के दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक लाइन में आ जाते हैं, पर उपछाया में ये तीनों एक लाइन में नहीं आते हैं इसी वजह से इसका सूतक मान्य नहीं होता है।

चंद्रगहण का वैज्ञानिक कारण

जब भी सूरज, चांद और पृथ्वी एक लाइन में आते हैं तो उस स्थिति को चंद्रग्रहण कहते हैं। इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी से दिखाई नहीं देता है। दरअसल चांद के पास खुद की रोशनी नहीं है। वह सूर्य के प्रकाश को ही हमारी तरफ रिफलेक्ट करके चमकता है। जब भी पृथ्वी सूर्य और चांद के बीच में आती है, तब पृथ्वी की वजह से सूर्य की रोशनी चांद तक नहीं पहुंचती और वह दिखना बंद हो जाता है। इसके अलावा सूर्य, पृथ्वी और चांद के बीच में आ जाता है तब भी हम चांद को नहीं देख पाते हैं। तीसरी स्थिति में चांद सूर्य और पृथ्वी के बीच आता है और वह सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक नहीं भेज पाता है ऐसी स्थिति में सूर्यग्रहण भी होता है।

चंद्रग्रहण का धार्मिक कारण

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण के समय चंद्रमा पीड़ित हो जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब राहु और केतु चंद्रमा को जकड़ लेते हैं तब चंद्र ग्रहण लगता है। इस वर्ष 26 मई 2021 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह चंद्र ग्रहण उपछाया ग्रहण कहा जाएगा।

उपछाया चंद्र ग्रहण

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उपछाया चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल मान्य नहीं होता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले ही सूतक काल लग जाता है। 26 मई को लगने वाले ग्रहण के दौरान सूतक काल के नियमों का पालन नहीं किया जाएगा।

Posted By: Sandeep Chourey

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