Valentine Day 2020: प्यार इंसानी जिंदगी का बेहद खुशनुमा लम्हा होता है और इन्ही हसीन पलों के सहारे वह सारी जिंदगी गुजार देता है। प्यार के रास्ते पर हर कोई चलता है, लेकिन काफी कम लोग खुशनसीब होते हैं जिनके प्यार को मंजिल मिलती है। इश्क की मंजिल पर बड़े ही रुमानी होकर कदम बढ़ाए जाते हैं, लेकिन हर किसी के जिंदगी में प्यार के पल हमेशा के लिए नहीं होते हैं। कुंडली के ग्रह आपके प्यार के हालात को बयां करते हैं। कुछ ग्रह प्यार के रंग भरते हैं तो कुछ प्यार को गठबंधन में बदल देते हैं। आइए जानते हैं, वो कौनसे ग्रह होते हैं जो प्यार को जिंदगीभर के रिश्ते में बदल देते हैं।

प्यार का सिलसिला कुंडली के शुभ ग्रहों से प्रारंभ होता है और इसका विवाह के रिश्तों में बदलना भी ग्रहों के योग पर निर्भर करता है। गौर करते हैं कुंडली के ऐसे ही कुछ खास शुभ योगों पर।

पांचवा भाव जगाता है प्यार का अहसास

कुंडली में पांचवा भाव या पांचवा स्थान प्यार के लिए होता है वहीं सातवां भाव या सातवां स्थान विवाह संबंधों को बताता है। ज्योतिष में शुक्र ग्रह को प्रेम के लिए जिम्मेदार माना जाता है। यानी कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति शुभ या बेहतर होने पर आपको प्यार नसीब होगा। कुंडली में पहले, पांचवें, सातवें और ग्यारहवें भाव या स्थान का संबंध शुक्र से होने से व्यक्ति प्रेमी स्वभाव का होता है। इंसान की कुंडली में पांचवें भाव का संबंध जब सातवें भाव से होता है तो प्रेम विवाह के गठबंधन में बदल जाता है। नौवें भाव का संबंध पांचवें भाव से होने पर भी प्रेम विवाह हो जाता है।

इसके अलावा कुंडली में कुछ और भी ग्रहयोग होते हैं जो इश्क के अहसास को रिश्तों की डोर में बांध देते हैं। पांचवें भाव का स्वामी पंचमेश शुक्र यदि सातवें स्थान में बैठा है तो प्रेम विवाह की संभावना काफी प्रबल होती है। कुंडली में शुक्र के अपने घर में विराजमान होने पर भी प्रेम विवाह का योग बनता है।

शनि भी प्रेम को शादी के गठबंधन में बदलता है

य़दि जन्म कुंडली में शुक्र पहले स्थान पर बैठा है और चंद्र कुंडली में शुक्र पांचवे भाग में है तो भी प्रेम विवाह की संभावना प्रबल रहती है। नवमांश कुंडली को जन्म कुंडली का शरीर माना जाता है। नवमांश कुंडली के सातवें भाव के स्वामी और नौवें भाव के स्वामी की युति हो तो प्रेम विवाह की प्रबल संभावना होती है। शुक्र पहले भाव में बैठा हो और साथ में पहले भाव का स्वामी ग्रह भी हो तो प्रेम विवाह के काफी अच्छे योग होते हैं।

शनि और केतु वैसे तो पाप ग्रह माना जाता है, लेकिन कुंडली के सातवें भाग में यदि इन दोनों की युति है तो प्यार को रिश्तों में बदलने वालों के लिए यह अच्छे संकेत है। पहले भाव में पहले भाव के स्वामी के साथ चंद्रमा की युति हो तो प्रेम विवाह के योग अच्छे होते हैं। इसी तरह सातवें भाव में सातवें भाव के स्वामी के साथ चंद्रमा की युति हो तो भी प्रेम गठबंधन में बंध जाता है।

Posted By: Yogendra Sharma

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