Valentine Day 2020: कहा जाता है कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपते। प्यार को किसी सरहद में नहीं बांधा जा सकता है ना ही इसमें धन-दौलत या उम्र का कोई बंधन होता है। कभी मोहब्बत का सिलसिला पड़ोस में परवान चढ़ने लग जाता है ते कभी इसमें सात समंदर पार की सीमाएं भी कोई मायने नहीं रखती है। दो लफ्जों के इस फलसफें में कायनात की खूबसूरती समाई हुई है। इसलिए कहा यह भी जाता है कि प्यार में हारना वाला ही सही मायने में जीतता है। यानी इसमें हार-जीत शब्द के लिए कोई जगह नहीं होती है। यह निश्चल और पवित्र होता है।

इंसान के जन्म के साथ ही उसके प्यार के योग भी बन जाते हैं। कुंडली की ग्रह दशा मोहब्बत के रिश्ते को आगे बढ़ाकर मंजिल तक पहुंचाती है। इंसान की कुंडली में कुछ योग ऐसे भी होते हैं, जब इंसान को अपने पड़ोस में ही मोहब्बत करने की वजह मिल जाती है। या कभी ऐसा भी होता है कि वह इश्क के जुनून में सभी रिश्ते-नातों को तोड़कर, हर हद को पार कर प्यार में धर्म तक बदल लेता है। कुंडली में कुछ ऐसे खास योग होते हैं, जो प्यार की इस जुनून के लिए जिम्मेदार होते हैं।

जब पड़ोसी से प्यार गठबंधन में बंध जाता है

यदि किसी इंसान की कुंडली के तीसरे या चौथे भाव में मंगल और शुक्र का योग हो तो पड़ोस या एक ही बिंल्डिंग में रहने वाले से प्रेम होता है। यदि इसमें भी बृहस्पति केंद्र या त्रिकोण में हो, तो प्रेम संबंध विवाह में बदल जाते हैं। नौवे या दसवे भाग में मंगल और शुक्र की युति यदि कुंडली में है तो प्यार व्यक्ति को कार्यस्थल पर होता है।

इश्क का जुनून बदल देता धर्म

यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सातवें और नौवें भाव में एक-एक क्रूर ग्रह हो और इन दोनों का किसी अन्य बली ग्रह से कोई संबंध नहीं हो तो ऐसा व्यक्ति शादी करने के लिए अपना धर्म बदल लेता है। यदि सातवें भाव में चंद्रमा, मंगल या शनि की राशि जैसे कर्क, मेष, वृश्चिक, मकर या कुंभ हो और बारहवें भाव में कोई दो क्रूर ग्रह बैठे हो तो व्यक्ति शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन कर लेता है।

Posted By: Yogendra Sharma

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