Vastu Tips। ऋग्वेदीय ब्रह्मकर्म समुच्चय ग्रंथ में खाना खाते समय और परोसते समय कुछ नियमों का पालन करने के बारे में विस्तार से बताया गया है। हिंदू धर्म शास्त्र में बताया गया है कि रसोई के नियमों का पालन करने से मां अन्नपूर्णा की कृपा मिलती है कि घर में अन्न की कभी कोई कमी नहीं रहती है। वास्तु शास्त्र पूरी तरह से ऊर्जा चक्र के सिद्धांत पर काम करता है और ऐसे में किचन में खाना बनाते समय और परोसते समय कुछ खास नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। वास्तु शास्त्र के मुताबिक अगर घर में सुख-समृद्धि लाना है तो मां अन्नपूर्णा की कृपा बेहद जरूरी होती है। मां अन्नपूर्णा के आशीर्वाद से ही हर घर में रसोई बन पाती है। ऋग्वेदीय ब्रह्मकर्म समुच्चय ग्रंथ थाली परोसने की संपूर्ण विधि के बारे में विस्तार से बताया गया है।

खाना परोसते समय के कुछ खास नियम

- भोजन को थाली में परोसने से पहले भूमि पर जल से एक मंडल बनाएं। उसके बाद उस पर थाली रखनी चाहिए।

- थाली को चौकी या पाट पर रखना चाहिए।

- थाली के बीच में चावल, पुलाव, हलुवा आदि परोसना चाहिए।

- थाली के बाएं तरफ ऐसे खाद्य पदार्थ रखना चाहिए, जिन्हें बहुत ज्यादा चबाकर खाया जाता है।

- थाली में दाएं तरफ मीठी खाद्य सामग्री रखना चाहिए।

- थाली में नमक खाने वाले सामने यानी ऊपर की तरफ रखना चाहिए।

- नमक के बाएं ओर पापड़, नींबू, अचार, चटनी जैसी रखना चाहिए।

- थाली में दाएं तरफ दाल, सब्जी, छाछ, दही, सलाद रखना उचित होता है।

- थाली में कभी भी भूलकर तीन रोटी, पराठे या फिर पूड़ी न परोसें।

- जो व्यक्ति खाना खा रहा है, उसकी दांयी ओर पानी से भरा गिलास रखना चाहिए।

भोजन करते समय इन नियमों का करें पालन

खाना खाने वाले व्यक्ति को हमेशा सुखासन की अवस्था में बैठना चाहिए। भोजन कभी भी खड़े होकर या अन्य अवस्था में नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से सेहत को नुकसान होता है। खाना खाने से पहले देवी-देवता का मनन करना चाहिए और उन्हें शुक्रिया करना चाहिए। भोजन करने से पहले एक रोटी के तीन टुकड़े जरूर निकाल लें। इसे गाय, कुत्ते और कौवे को खिलाना चाहिए। हिंदू धर्म में मान्यता है कि इन टुकड़ों को आप ब्रह्मा, विष्णु और महेश के नाम पर निकाल रहे हैं। भोजन करते समय बात भी नहीं करना चाहिए और अपने हाथों को कभी भी थाली या पत्तल में नहीं धोना चाहिए।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'

Posted By: Sandeep Chourey

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