हिंदू त्योहार धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व रखते हैं। मकर संक्रांति भी इन्हीं त्योहारों में से एक है। संक्रांति का अर्थ होता है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना।

इस दिन से सूर्य उत्तरायण होता है, जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है। मान्यता है कि इसी दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है।

मकर संक्रांति वैदिक काल से जारी है। दरअसल मकर संक्रांति का संबंध ऋतु परिवर्तन और कृषि से है। यह पर्व अपना धार्मिक महत्व भी रखता है। इस दिन उत्तरायण के समय देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन का समय देवताओं की रात्रि होती है, वैदिक काल में उत्तरायण को देवयान तथा दक्षिणायन को पितृयान कहा गया है।

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मकर संक्रांति के बाद माघ मास में उत्तरायण में सभी शुभ कार्य किए जाते हैं। इस दिन के बाद हर दिन तिल-तिल बढता है इसलिए इसे तिल सक्रांति भी कहते हैं। इस पर्व को खिचड़ी सक्रांति भी कहा जाता है।

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