Yashoda Jayanti 2021। मार्च माह में कई हिंदू त्योहार मनाए जाते हैं। होली और महाशिवरात्रि के अलावा कुछ और भी ऐसे त्यौहार व व्रत है, जिसका पौराणिक महत्व बहुत अधिक है। इन्हीं त्योहारों में यशोदा जयंती का भी विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती मनाई जाती है। इस दिन मां यशोदा का जन्म हुआ था। वैसे तो भगवान कृष्ण को माता देवकी ने जन्म दिया था लेकिन उनका लालन-पोषण मां यशोदा ने किया था। इस दिन मां यशोदा के भक्त उनकी पूरे विधि-विधान के साथ पूजा करते हैं।

यशोदा जयंती का शुभ मुहूर्त:

4 मार्च, गुरुवार

षष्ठी तिथि शुरु- 4 मार्च, गुरुवार रात 12.21 मिनट से

षष्ठी तिथि समाप्त- 4 मार्च, गुरुवार रात 9 बजकर 58 मिनट पर

माता यशोदा जयंती का धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को माता यशोदा का जन्म हुआ था। कृष्ण के पिता वासुदेव ने कान्हा के पैदा होते ही उन्हें मामा कंस के आतंक से बचाने के लिए गोकुल में नंद बाबा के पास छोड़ दिया था। नंद बाबा की पत्नी यशोदा थीं और उन्होंने ही कृष्ण जी का लालन-पोषण किया था, इसलिए कृष्ण जी को मां यशोदा के बच्चे के रूप में जाना जाता है।

यशोदा जयंती पर ऐसे करें पूजा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यशोदा जयंती पर माता यशोदा की गोद में बैठे हुए कृष्ण जी की पूजा की जाती है। ऐसा करने से संतान संबंधित सभी दिक्कतें दूर हो जाती है और साथ ही सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण हो जाती हैं। साथ ही ऐसा भी माना जाता है कि अगर कोई महिला इस दिन भगवान श्री कृष्ण और यशोदा जी की पूजा करती है तो उसे भगवान श्री कृष्ण बाल रूप में दर्शन देते हैं। साथ ही मनोकामना भी पूरी होती है।

Posted By: Sandeep Chourey

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