नई दिल्ली (एजेंसियां)। इंग्लैंड में हुए वर्ल्ड कप के बाद टीम इंडिया के कोचिंग स्टाफ को बदलने की कवायद जरूर हुई। लेकिन बदलाव हुआ केवल एक। रवि शास्त्री की हेड कोच के रूप में वापसी हुई। भरत अरुण को गेंदबाजी कोच और आर श्रीधर को फील्डिंग कोच बनाए रखा गया। केवल संजय बांगर को बल्लेबाजी कोच के पद से हटा दिया गया। उनका स्थान विक्रम राठौर ने लिया। पद से हटाए जाने के बाद अब बांगर का दर्द छलका है।

दरअसल संजय बांगर इसलिए निशाने पर आए क्योंकि वे टीम के नंबर 4 के स्लॉट की परेशानी को दूर नहीं कर पाए। इंग्लैंड में हुए वर्ल्ड कप के दौरान इसी परेशानी का खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा था। बांगर अपने 5 साल के काम से संतुष्ट हैं लेकिन उन्हें हटाए जाने के कारण को लेकर बीसीसीआई के फैसले से निराश हैं।

कार्यकाल पूरा कर टीम से अलग होने के बाद संजय बांगर ने मीडिया से बात की। उन्होंने 5 सालों के अपने काम पर संतोष जताते हुए कहा - मैंने टीम के साथ काफी मेहनत की और इसके अच्छे परिणाम भी मिले। मुझे केवल वर्ल्ड कप नहीं जीत पाने का अफसोस है। मैं बीसीसीआई और टीम के हेड कोच रहे डंकन फ्लेचर, अनिल कुंबले और रवि शास्त्री को धन्यवाद देता हूं। बता दें कि इनके हेड कोच रहते ही बांगर ने बल्लेबाजी कोच की जिम्मेदारी निभाई थी।

हालांकि टीम से अलग होने पर बांगर का दर्द भी छलककर सामने आया। बांगर ने कहा - टीम के साथ हमारी कड़ी मेहनत के कारण ही टीम का प्रदर्शन प्रभावी रहा और टीम लंबे समय से नंबर एक टेस्ट टीम बनी है। इसके बावजूद उन्हें हटाया जाना बीसीसीआई का निराशाजनक फैसला है।

नंबर 4 का स्लॉट बना कारण

टीम के नंबर 4 की स्लॉट पर बल्लेबाजी की समस्या हल नहीं कर पाने का खामियाजा बांगर को भुगतना पड़ा। बांगर के कार्यकाल में टीम इंडिया का वनडे क्रिकेट में नंबर 4 के लिए बल्लेबाज नहीं तलाश पूरी नहीं हुई। इसे लेकर बांगर ने कहा- ये जिम्मेदारी टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ताओं की है। वे ही तय करते हैं कि किस नंबर पर कौन सा बल्लेबाज अच्छा खेल सकता है। मैं मानता हूं कि इसके लिए सभी जिम्मेदार है। फिलहाल इस नंबर के लिए हमारी प्राथमिकता ये थी कि सबसे फिट बल्लेबाज जो फॉर्म में हो और वो गेंदबाजी भी कर ले, उसे चुना जाए। हम इसी फॉर्मूले के अनुसार आगे बढ़े, पर ये काम नहीं कर पाया।

बता दें कि नंबर 4 के स्लॉट पर टीम ने अम्बाती रायुडू, केएल राहुल, रिषभ पंत, विजय शंकर, दिनेश कार्तिक, हार्दिक पांड्या, श्रेयस अय्यर, केदार जाधव जैसे कई बल्लेबाजों को आजमाया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं मिला।

विराट, रोहित, शिखर की बल्लेबाजी को निखारा

बांगर मानते हैं कि उनके कार्यकाल में कप्तान विराट कोहली, शिखर धवन, रोहित शर्मा और चेतेश्वर पुजारा जैसे बल्लेबाजों के खेल में काफी निखार आया। बांगर के रहते कोहली ने पिछले 4 सालों में 43 शतक लगाए। उन्होंने कहा - विराट बहुत मेहनती हैं और अपनी कमियों को दूर करने के लिए हमेशा लगे रहते हैं। हमने उनके बैलेंस, क्रीज पर खड़े रहने की पोजिशन, सीमिंग कंडीशंस में उनकी अप्रोच जैसे कई मामलों पर काम किया और इसके काफी अच्छे परिणाम आए।

वहीं शिखर धवन ने बांगर के कार्यकाल में 18 शतक लगाए। शिखर को लेकर बांगर ने कहा - शिखर को शुरुआत में ऑफ साइड का खिलाड़ी ही माना जाता था। वे गेंद की लाइन की साइड में रहकर बल्लेबाजी करते थे। लेकिन बाद में हमने उनके साथ काम किया ताकि वे गेंद की लाइन के पीछे आकर खेल सकें। इससे उनके लिए ज्यादा शॉट्स खेलने की संभावनाएं खुल गई और वे ज्यादा रन बनाने लगे। पहले शॉर्ट बॉल खेलने में उन्हें परेशानी होती थी और वे अक्सर उसपर आउट भी हो जाते थे, लेकिन बाद में हमने उनकी इस कमी को दूर किया।

बांगर के रहते रोहित का बल्ला भी जमकर चला है। इस दौरान रोहित ने 28 शतक लगाए। रोहित को लेकर बांगर ने बताया - रोहित एंगल के साथ फेंकी जाने वाली गेंदों पर उनकी हेड पोजिशन सही नहीं रहती थी, जिसके चलते उन्हें परेशानी आती थी। हमने इस पर काम किया। इस कमी को दूर करने के बाद ही रोहित को विदेशी दौरों पर काफी ज्यादा लाभ हुआ और उन्होंने जबर्दस्त प्रदर्शन किया।

इसी तरह चेतेश्वर पुजारा ने बांगर के कार्यकाल में 18 शतक लगाए हैं। पुजारा को लेकर बांगर ने कहा - पुजारा के मामले में उनके स्टांस की चौड़ाई कम की और उन्हें थोड़ा और सीधा होकर खड़े होने की सलाह दी। इसके बाद पुजारा भी ज्यादा बेहतर तरीके से खेल पा रहे हैं। हालांकि बांगर ने इसका पूरा श्रेय इन खिलाड़ियों को ही दिया जिन्होंने उनकी बताई सलाह पर अमल किया और उसका फायदा लिया।

ज्यादा टेस्ट और वनडे जीते

बांगर ने कहा - मैं 2014 में टीम के साथ जुड़ा था। इसके बाद हमने काफी मेहनत की। हमारी टीम 3 सालों से नंबर 1 टेस्ट टीम है। ये उपलब्धि खुशी देती है। हमने 52 में से 30 टेस्ट जीते। इनमें से 13 जीत विदेशी दौरों पर मिली। वनडे क्रिकेट में भी हमारा प्रदर्शन काफी प्रभावी रहा और हमने लगभग सभी विदेशी दौरों पर मैच जीते। भारतीय बल्लेबाजों ने इन 52 टेस्ट मैचों में 70 शतक लगाए।

वहीं वनडे क्रिकेट की बात करें तो बांगर के कार्यकाल में भारत ने 122 में से 82 मैच जीते। 35 मुकाबलों में उसे हार का सामना करना पड़ा। इन मैचों में भारतीय बल्लेबाजों ने कुल 74 शतक लगाए। बांगर ने बताया कि अपने इस कार्यकाल में उन्हें सिर्फ वर्ल्ड कप नहीं जीत पाने का अफसोस है।

इसके अलावा टीम इंडिया ने इस दौरान 66 टी 20 इंटरनैशनल मैच खेले, जिनमें से टीम ने 43 मैच जीते और 21 हारे। इस दौरान 6 खिलाड़ियों ने शतक लगाए।

गौरतलब है कि टीम इंडिया के कोचिंग स्टाफ का कार्यकाल वर्ल्ड कप के साथ ही समाप्त हो रहा था लेकिन बाद में इसे वेस्टइंडीज दौरे तक बढ़ाया गया। बाद में जब नए सिरे से कोचिंग स्टाफ का चयन हुआ तो रवि शास्त्री (हेड कोच), भरत अरुण (गेंदबाजी कोच) और आर श्रीधर (फील्डिंग कोच) को बनाए रखा गया और केवल संजय बांगर को हटाया गया। बांगर के स्थान पर विक्रम राठौर टीम के नए बल्लेबाजी कोच होंगे।