नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) कई सालों तक इंकार करने के बाद नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (NADA) के दायरे में आने को राजी हो गया। वित्तीय रूप से स्वायत्त संस्था होने के बावजूद बीसीसीआई अब एक राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) बन गया।

दुनिया के सबसे अमीर खेल संगठनों में शामिल बीसीसीआई सालों से NADA के तहत आने से इंकार करता आ रहा था और खेल मंंत्रालय के सामने झुकने को तैयार नहीं था। खेल सचिव राधेश्याम झुलानिया और NADA के महानिदेशक नवीन अग्रवाल के साथ बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी और बीसीसीआई के क्रिकेट ऑपरेशंस (जीएम) सबा करीम ने मुलाकात की। बीसीसीआई ने इस मुलाकात के दौरान लिखित में आश्वासन दिया कि वह नाडा की नीति का पालन करेगा। झुलानिया ने कहा, अब सभी क्रिकेटरों का NADA द्वारा परीक्षण किया जाएगा।

इस पहल की बीसीसीआई के लिए झटके के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि NSF बन जाने की वजह से अब सरकारी नियमों के चलते उस पर राइट टू इनफॉर्मेशन (आरटीआई) को मानने का दवाब बढ़ जाएगा। झुलानिया ने कहा, बीसीसीआई ने हमारे सामने तीन चिंताएं प्रकट की, उसने डोप टेस्टिंग किट्स, पेथालॉजिस्ट की काबिलियत और सैंपल एकत्रिकरण पर सवाल उठाए हैं। हमने उन्हें आश्वस्त किया कि वे जिन सुविधाओं को चाहते हैं वह उन्हें मुहैया कराई जाएगी लेकिन उसका खर्च उन्हें उठाना होगा। सभी NSF के लिए सुविधाएं एक समान है और उन्हें इस नियम का पालन करना होगा।

अभी तक बीसीसीआई नाडा के अंतर्गत आने से इंकार करता रहा था। अभी तक BCCI कहता था कि वह स्वायत्त इकाई है और वो सरकार से किसी तरह की फंडिग लेता है। हालांकि, खेल मंत्रालय हमेशा ही कहता रहा है कि बीसीसीआई को नाडा के दायरे में आना होगा।