नई दिल्ली। बीसीसीआई के 23 अक्टूबर को होने वाले चुनावों से पहले 8 राज्य संघों को बड़ा झटका लगा है। बीसीसीआई ने इन 8 राज्य इकाइयों को बोर्ड की एजीएम में भाग लेने पर रोक लगा दी। दरअसल इन राज्य एसोसिएशनों ने संविधान में संशोधन का अनुपालन नहीं किया।

बीसीसीआई के निर्वाचन अधिकारी एन गोपालस्वामी द्वारा अंतिम मतदाता सूची जारी करने के बाद एजीएम में भाग लेने वालों पर स्थिति स्पष्ट हो गई।

इनको मतदान का अधिकार नहीं होगा

एजीएम के दौरान अगर पदाधकारियों के लिए चुनाव होता है तो मणिपुर, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, हरियाणा, महाराष्ट्र, रेलवे, सेना और भारतीय विश्वविद्यालयों के संघ के पास मतदान का अधिकार नहीं होगा। तीन सरकारी संस्थानों को इसलिए प्रतिबंधित किया गया क्योंकि वह खिलाड़ियों का संघ बनाने में नाकाम रहे। बुधवार को प्रशासकों की समिति ने तमिलनाडु क्रिकेट संघ (टीएनसीए), महाराष्ट्र क्रिकेट संघ (एमसीए) और हरियाणा क्रिकेट संघ (एचसीए) को एजीएम में भाग लेने से रोक दिया था। टीएनसीए का प्रतिनिधित्व सचिव एसएस रामास्वामी को करना था, जबकि हरियाणा की नुमाइंदगी मृणाल ओझा कर रहे थे। महाराष्ट्र को एजीएम से हटा दिया गया क्योंकि चैरिटी आयुक्त ने क्रिकेट संघ के संशोधित संविधान में विसंगतियां पाई थी। एमसीए अब भी बीसीसीआई के पूर्व सचिव अजय शिर्के के नियंत्रण में है जिसका प्रतिनिधित्व रियाज बागबान को करना था। टीएनसीए ने बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन की बेटी रूपा गुरुनाथ को हाल ही में पहली महिला अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुना गया। आरोप है कि टीएनसीए के 21 अनुच्छेद ऐसे हैं जिनमें लोढ़ा समिति की सिफारिशों का अनुपालन नहीं किया गया है जिसमें उम्र सीमा और दो कार्यकाल के बीच बाहर रहने के लिए तय अनिवार्य अवधि (कूलिंग ऑफ पीरियड) का अनुपालन नहीं किया जाना शामिल है। हरियाणा और महाराष्ट्र को भी इसी तर्ज पर रोका गया है।

इनको मिली हरी झंडी

भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली एजीएम में बंगाल क्रिकेट संघ के प्रतिनिधि होंगे, जिसके वह अध्यक्ष हैं। भारत के एक अन्य पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन हैदराबाद क्रिकेट संघ का प्रतिनिधित्व करेंगे। रजत शर्मा (दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ), जय शाह (सौराष्ट्र किकेट संघ), अरुण सिंह धूमल (हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ) और बृजेश पटेल (कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ) अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे। एजीएम में भाग लेने से रोके जाने वाले ज्यादातर राज्यों के द्वारा इस फैसले को अदालत में चुनौती देने की संभावना है, जिससे एजीएम अधर में पड़ सकता है।

BCCI के पूर्व वकील ने कहा, सीओए का फैसला मनमाना और गलत

कोलकाता। इधर बीसीसीआई के पूर्व प्रमुख कानूनी सलाहकार ऊषा नाथ बनर्जी ने तीन राज्य संघों को बोर्ड की सालाना आम बैठक (एजीएम) में भाग लेने से रोकने के सीओए के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे 'पूरी तरह मनमाना और गलत" करार दिया। बनर्जी ने हालांकि कहा कि अगर किसी राज्य ने बदलावों का अनुपालन नहीं किया है तो उसे पहले साल के लिए वित्तीय अनुदान और अन्य लाभों से वंचित किया जा सकता है, लेकिन एजीएम में भाग लेने से नहीं रोका जा सकता है। बनर्जी ने कहा- एक बार जब राज्य संघ पूर्ण सदस्य के तौर पर मान्यता प्राप्त कर लेता है, तब एजीएम में भाग लेना और मतदान करना उसका कानूनी और संवैधानिक अधिकार है। उसके इस अधिकार को व्यक्तियों का समूह तब तक वापस नहीं ले सकता जब तक वह मनमाना और गैर कानूनी ना हो। बीसीसीआई की आम सभा भी उसे नहीं रोक सकती।