मुंबई (एजेंसियां)। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। एक तरफ जहां इसके फैंस की संख्या लगातार बढ़ रही है, वहीं ब्रांड वैल्यू की बात करें तो 2019 में ये 7 प्रतिशत बढ़कर 6.8 अरब डॉलर (करीब 48 अरब 51 करोड़ रुपए) हो गई है।

डेफ एंड फेल्प्स कंसलटेंसी फर्म की रिपोर्ट से साफ है कि आईपीएल एक बड़ी इंडस्ट्री का रूप ले चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक आईपीएल में मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपरकिंग्स फ्रेंचाईजी की वैल्यू में तेजी से इजाफा हुआ है, जबकि चौंकाने वाली बात है कि शाहरूख खान के मालिकाना हक वाली कोलकाता नाईटराइडर्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की ब्रांड वैल्यू में करीब 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

मुंबई इंडियंस सबसे धनी

मुकेश अंबानी के मालिकाना हक वाली फ्रेंचाईजी मुंबई इंडियंस आईपीएल की सबसे धनी टीम है। बता दें कि मुंबई इंडियंस 4 बार की विजेता है। उसकी ब्रांड वैल्यू में 8.5 फीसदी की वृद्धि हुई और ये बढ़कर अब 809 करोड़ रुपए की हो गई है। इससे स्पष्ट है कि मुंबई आईपीएल की सबसे मूल्यवान टीम है। दूसरे स्थान पर चेन्नई सुपरकिंग्स की टीम है। इंडिया सीमेंट्स के मालिकाना हक वाली CSK की ब्रांड वैल्यू में 13.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और इसकी वैल्यू बढ़कर 732 करोड़ रुपए हो गई है। जिन फ्रेंचाईजी की ब्रांड वैल्यू में इजाफा हुआ उनमें जिंदल्स ग्रुप की दिल्ली कैपिटल्स भी शामिल है। दिल्ली की ब्रांड वैल्यू में 8.9 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की गई और अब ये 374 करोड़ रुपए हो गई है। बता दें कि दिल्ली इस बार लीग के क्वालिफायर स्टेज तक पहुंची थी।

विराट, शाहरूख की टीमों को झटका

एक तरफ जहां पूरे आईपीएल और बड़ी टीमों के ब्रांड वैल्यू में बढ़ोतरी हुई है, वहींं कुछ टीमों की ब्रांड वैल्यू में गिरावट भी दर्ज की गई। इनमें विराट कोहली की कप्तानी वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और शाहरूख खान की मालिकाना हक वाली कोलकाता नाईटराइडर्स (KKR) टीम शामिल हैं। RCB और KKR की ब्रांड वैल्यू में करीब 8 फीसदी की गिरावट आई है। इसका सीधा कारण है कि ये दोनों टीमें आईपीएल 2019 में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। इनमें से RCB का प्रदर्शन तो बेहद निराशाजनक रहा था। इनके अलावा मीडिया मुगल मर्डोक परिवार की राजस्थान रॉयल्स (RR) की ब्रांड वैल्यू भी कम हुई। इन टीमों की ब्रांड वैल्यू एक साल पहले 284 करोड़ रुपए थी जो अब घटकर 271 करोड़ रुपए हो गई है।

बता दें कि फटाफट क्रिकेट के इस फॉर्मेट की लोकप्रियता को देखते हुए भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने इंडियन प्रीमीयर लीग के नाम से साल 2008 में टी20 प्रीमियर क्रिकेट लीग की शुरुआत की थी। इसमें कॉर्पोरेट जगत की 8 टीमें शामिल हैं। बाद में इसमें दो और टीमें बढ़ाई गई, लेकिन बाद में टीमों की संख्या फिर 8 रह गई।