नई दिल्ली। टीमें हर विश्व कप में कुछ अप्रत्याशित कदम उठाकर विपक्षियों को चौंकाने का प्रयास करती हैं और टीम इंडिया भी इस बार इंग्लैंड में विजय शंकर को बल्लेबाजी में चौथे क्रम पर उतारकर ऐसा कुछ कर सकती हैं।

2003 विश्व कप में वीवीएस लक्ष्मण को टीम से बाहर कर दिनेश मोंगिया का उपयोग स्पिन गेंदबाज के ऑलराउंडर के रूप में किया गया था। 2011 विश्व कप में युवराज सिंह का उपयोग पांचवें गेंदबाज के रूप में किया गया और उन्होंने 15 विकेट लिए थे। इंग्लैंड में इस बार होने वाले विश्व कप में टीम इंडिया चौथे क्रम के बल्लेबाज को लेकर असमंजस की स्थिति में चल रही है। आईपीएल के पहले तीन सप्ताह के बाद इस मामले में स्थिति साफ हो पाएगी। भारतीय टीम की घोषणा 15 से 20 अप्रैल के बीच होगी।

भारतीय टीम प्रबंधन विजय शंकर की तकनीक और दबाव के क्षणों में उनके टेम्परामेंट से बहुत खुश है। शंकर को इस मामले में अंबाती रायुडू से चुनौती मिल सकती है लेकिन 47 प्लस के औसत के बावजूद रायुडू की दावेदारी अब कमजोर होती जा रही हैं। टीम प्रबंधन से जुड़े सूत्र के अनुसार रायुडू ने वेलिंगटन में 90 रनों की पारी के बाद चौथे क्रम पर प्रभावी प्रदर्शन नहीं किया है। आईपीएल के अच्छे प्रदर्शन से स्थिति बदल सकती है लेकिन यह आम धारणा है कि वे झन्नाटेदार गेंदबाजों के सामने सहज नहीं रह पाते हैं। रायुडू की बड़ी पारियां अपेक्षाकृत कमजोर टीमों जिम्बाब्वे, श्रीलंका, अफगानिस्तान, हांगकांग और वेस्टइंडीज के खिलाफ आई है।

विजय के साथ अच्छी बात यह है कि वे बड़े शॉट्स खेलने के अलावा पांच ओवर गेंदबाजी भी कर सकते हैं। केदार जाधव और हार्दिक पांड्या क्रमश: छठे और सातवें क्रम पर बल्लेबाजी करने के साथ ही मिलकर 10 ओवर गेंदबाजी करेंगे।

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