मैनचेस्टर। इंग्लैंड के ओपनर जेसन रॉय को गुरुवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड कप सेमीफाइनल मैच के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन को दोषी पाया गया। आईसीसी ने रॉय को आचार संहिता की धारा 2.8 के उल्लंघन को दोषी पाया और उन पर 30 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना किया गया।

इसके अलावा रॉय के अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में दो डिमैरिट अंक जोड़े गए। यह मामला तब हुआ जब इंग्लैंड की पारी के 19वें ओवर में रॉय को अंपायर कुमार धर्मसेना ने आउट करार दिया। रॉय उस समय 85 रनों पर खेल रहे थे। मैदानी अंपायरों धर्मसेना, मरायस इरासमस, थर्ड अंपायर क्रिस गफाने और रिजर्व अंपायर आलीम डार ने रॉय पर यह चार्ज लगाए। चूंकि रॉय ने यह आरोप स्वीकार कर लिए इसलिए मैच रैफरी रंजन मदुगले को आधिकारिक सुनवाई की आवश्यकता नहीं पड़ी।

अंपायर के गलत फैसले का शिकार हुए रॉय

रॉय जब 85 रन बनाकर खेल रहे थे तब उन्होंने पैट कमिंस की लेग स्टंप के बाहर की तरफ जाती गेंद को पुल करने का प्रयास किया वे चूके और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने उनके कैच बिहाइंड होने की अपील की। अंपायर धर्मसेना ने थोड़े सोच-विचार के बाद उंगली उठा दी। रॉय तो यकीन ही नहीं कर पा रहे थे। गेंद ने रॉय के बल्ले को छुआ नहीं था, वे रिव्यू भी नहीं ले सकते थे क्योंकि इंग्लैंड के पास रिव्यू बचा नहीं था। रॉय तो क्रीज पर से जाने को तैयार ही नहीं थे उन्होंने दूसरे अंपायर इरासमस से बात की लेकिन उन्होंने रॉय को पैवेलियन लौटने को कहा। रॉय का गुस्सा साफ नजर आ रहा था। रिप्ले में साफ दिखा कि गेंद और बल्ले के बीच कोई संपर्क नहीं हुआ था और रॉय गलत फैसले का शिकार हुए थे और वे शतक से चूके थे। उन्होंने चेंजिंग रूम में जाकर ग्लव्स भी फेंके।

ऑस्ट्रेलियाई टीम यदि चाहती तो अपील वापस लेकर रॉय को वापस बुला सकती थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बावजूद इंग्लैंड ने यह मैच 8 विकेट से जीतकर 27 साल बाद फाइनल में प्रवेश किया। ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए स्टीव स्मिथ के 85 रनों की मदद से 223 रन बनाए थे। इसके जवाब में इंग्लैंड ने 32.1 ओवरों में 2 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल किया।