IND vs NZ, First Test, First Day : कानपुर टेस्ट में पहले दिन टीम इंडिया शुरुआती झटकों के बावजूद बेहतर स्थिति में पहुंचने में सफल रही। पहला दिन भारतीय बल्लेबाजों शुभमन गिल, श्रेयस अय्यर और रवींद्र जडेजा के नाम रहा। तीनों ने ही अर्धशतक जमाए और स्टंप्स तक 4 विकेट पर 258 रन बनाए। शुभमन गिल ने 52 रन बनाये, तो रवीन्द्र जडेजा ने 50 रनों की नाबाद पारी खेली। वहीं अपने डेब्यू टेस्ट की पहली पारी में ही श्रेयस अय्यर ने नाबाद 75 रन बनाए। जडेजा और श्रेयस अय्यर ने पांचवें विकेट के लिए शतकीय साझेदारी की और टीम का स्कोर 258 रनों तक पहुंचाया। इस पूरी पारी में सबसे प्रभावित किया श्रेयस अय्यर ने, जो अपने पहले टेस्ट शतक के करीब पहुंच चुके हैं।

श्रेयस ने दोहराया 7 साल पहले वाला प्रदर्शन

आपको बता दें कि सात साल पहले कानपुर में ही मुंबई का एक नया स्टार बल्लेबाज़ उभरा था, श्रेयस अय्यर। मुंबई के तत्कालीन कोच प्रवीण आमरे के मुताबिक दिसंबर 2014 में कानपुर में रणजी ट्रॉफी श्रेयस के लिए मेक-या-ब्रेक वाला मैच था। पहले दो मैचों में श्रेयस असफल रहे थे और कोच आमरे को उन्हें शामिल करने के लिए विरोध का सामना भी करना पड़ा था। लेकिन उन्होंने श्रेयस पर पूरा भरोसा जताया। कानपुर में 19 साल के श्रेयस ने ना सिर्फ़ लाल गेंद के क्रिकेटर के रूप में ख़ुद को स्थापित किया, बल्कि आमरे की इज्जत भी रख ली।

मुंबई ने उत्तर प्रदेश के खिलाफ पहली पारी में 206 रनों के जवाब में 53 रनों पर पांच विकेट गंवा दिए थे। विकेट लगातार गिरते जा रहे थे और श्रेयस ड्रेसिंग रूम के गरमाए माहौल को महसूस कर रहे थे। जब वो बल्लेबाजी के लिए उतरे तो तीसरी गेंद पर ही छक्का लगा दिया। उन्होंने प्रवीण कुमार की चौथी गेंद पर मिडविकेट की ओर उठाकर मार दिया और अगली गेंद पर एक शानदार एक्स्ट्रा कवर की ओर खूबसूरत ड्राइव लगाई। श्रेयस की पहली 10 गेंद में छह बाउंड्री आ चुकी थी। श्रेयस जब वापस लौटे तब तक उत्तर प्रदेश के ख़िलाफ़ वह धमाकेदार 75 रनों की पारी खेल चुके थे, और मुंबई ने बढ़त हासिल कर ली थी। श्रेयस ने उस सीज़न में 809 रन बनाए थे।

पहले भी दिखाई है अपनी क्षमता

गुरुवार को श्रेयस भारत के 303वें पुरुष टेस्ट क्रिकेटर बने। यह कैप उन्हें 54 प्रथम श्रेणी मैचों में 52.18 के औसत से 4592 रन बनाने के बाद नसीब हुई। भारतीय टेस्ट टीम के साथ श्रेयस का यह पहला अनुभव नहीं है। मार्च 2017 में, उन्हें धर्मशाला में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ चौथे और अंतिम टेस्ट के लिए विराट कोहली के प्रतिस्थापन के रूप में बुलाया गया था। यह कॉल-अप कुछ हफ़्ते पहले एक वार्म-अप गेम में उनके एक दमदार प्रदर्शन का परिणाम था। इस मैच को प्रथम श्रेणी दर्जा प्राप्त था। श्रेयस ने ऑस्ट्रेलिया खिलाड़ियों की स्लेजिंग के बावजूद पहली ही गेंद छक्का लगाकर अपना हौसला दिखा दिया। श्रेयस ने उस मैच में अपना सर्वोच्च प्रथम श्रेणी स्कोर 202* बनाया था।

श्रेयस की खासियत है उनकी निडरता

श्रेयस के खेल में जो निडरता है, वह उनके अपार आत्मविश्वास से आई है। यह 54 प्रथम श्रेणी मैचों में 82 के उनके अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट में दिखता भी है। 2015-16 में रणजी ट्रॉफ़ी फ़ाइनल में श्रेयस ने 82 के स्ट्राइक रेट से 117 रन की मैच जिताऊ पारी खेली थी। ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 2017 में उनका वह दोहरा शतक मात्र 210 गेंद में आया था। इसी साल उन्होंने विजयवाड़ा में दो अनाधिकृत टेस्ट में न्यूज़ीलैंड ए के ख़िलाफ़ 108 और 82 रनों की पारी खेली थी, जिसमें मैट हेनरी, लॉकी फ़ग्र्युसन और ईश सोढ़ी जैसे गेंदबाज़ थे।

कोच आमरे के मुताबिक बाउंड्री लगाने की उनकी आदत, खेल को आगे बढ़ाने की उनकी क्षमता और एक सत्र में सौ रन हासिल करने की सोच उन्हें सबसे अलग बनाती है। 2014 में एक नये खिलाड़ी से लेकर 2021 में एक अनुभवी खिलाड़ी तक, कानपुर में उनकी वापसी ने उनके करियर का एक चक्र पूरा कर लिया है, जो अब लगातार चढ़ता जा रहा है।

Posted By: Shailendra Kumar