इंदौर (ब्यूरो)। लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच की राह देख रहे इंदौर के प्रशंसकों को जिम्बाब्वे और भारत के बीच होलकर स्टेडियम में होने वाले मैच से वंचित रहना पड़ सकता है। जिम्बाब्वे क्रिकेट बोर्ड में बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण है आईसीसी उस पर प्रतिबंध लगा सकता है।

आईसीसी की वार्षिक कांफ्रेंस सोमवार से मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की बैठक के साथ शुरू हो रही है। इसमें जिम्बाब्वे की सदस्यता पर भी चर्चा होगी। हाल में जिम्बाब्वे सरकार के खेल एवं मनोरंजन आयोग ने जिम्बाब्वे क्रिकेट को भंग कर अंतरिम समिति बना दी थी। जिम्बाब्वे को टेस्ट क्रिकेट के टीयर-2 में रेलीगेट कर दिया गया है, इस समय जिम्बाब्वे आयरलैंड से द्विपक्षीय सीरीज खेल रहा है। उसके अगले साल जनवरी में संक्षिप्त सीरीज के लिए भारत की यात्रा प्रस्तावित है।

इसलिए लग सकता है प्रतिबंध

जिम्बाब्वे की सरकार ने राष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड को पिछले माह भंग कर कर अंतरिम समिति बना दी थी। आईसीसी के अनुसार किसी भी देश के राष्ट्रीय बोर्ड में सरकारी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। हालांकि भारत में भी बीसीसीआई पर भी प्रशासकों की समिति का नियंत्रण है।

इंदौर में खेलना है टेस्ट

इंदौर में पिछले दो साल से कोई अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं हुआ है। शहर में पिछला अंतरराष्ट्रीय मैच दिसंबर 2017 में भारत और श्रीलंका के बीच टी-20 मैच था। इसके बाद पिछले साल 24 अक्टूबर को यहां भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सीरीज का दूसरा वन-डे मैच होना था, लेकिन मुफ्त पास के मुद्दे पर बात बिगड़ी और इंदौर में मैच नहीं हो सका। बीते माह बीसीसीआई ने बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट और जिम्बाब्वे के खिलाफ टी-20 मैच की मेजबानी इंदौर को सौंपी थी। जिम्बाब्वे से टक्कर अगले साल 7 जनवरी को होना है। मगर वर्तमान हालात में जिम्बाब्वे का दौरा रद्द हो सकता है, जिसका नुकसान इंदौर के प्रशंसकों को होगा।

आईसीसी के झंडे तले खेल सकते हैं खिलाड़ी

यदि राजनीतिक उठापठक खत्म नहीं होती तो संभव है कि खिलाड़ियों के हित में आईसीसी उन्हें खेलने की अनुमति दे, लेकिन जिम्बाब्वे बोर्ड को मिलने वाली राशि रोक ले। यह सालाना 9 मिलियन पौंड है। ऐसे में खिलाड़ी आईसीसी के झंडे तले खेलेंगे और उनकी फंडिग आईसीसी करेगा। पिछले कुछ सालों में नेपाल और अमेरिका के बोर्ड भी प्रतिबंधित हुए थे, लेकिन खिलाड़ियों को मैच खेलने से नहीं रोका गया था।

अभी कोई सूचना नहीं

जिम्बाब्वे के बारे में हमने भी सुना है, लेकिन कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। जो भी निर्णय होगा वह आईसीसी या बीसीसीआई लेगी - मिलिंद कनमड़ीकर (सचिव, एमपीसीए)