IPL 2022 Match fixing: सीबीआई ने 2019 में आईपीएल मैचों की फिक्सिंग के आरोप में सात संदिग्ध सट्टेबाजों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। ये सभी पाकिस्तान से मिली सूचना के अधार पर मैच फिक्सिंग करते थे। एजेंसी ने इस सबंध में दो प्राथमिकी दर्ज की हैं। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने मामले में राष्ट्रव्यापी जांच शुरू की है और दिल्ली, हैदराबाद, जयुपर और जोधपुर में सात ठिकानों की तलाशी ली है। प्राथमिकी के अनुसार, एजेंसी को जानकारी मिली थी कि क्रिकेट सट्टेबाजी में शामिल नेटवर्क पाकिस्तान से मिली सूचना के आधार पर इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के मैचों के नतीजों को प्रभावित कर रहा है।

पहला गिरोह 2010 से व दूसरा 2013 से था सक्रिय

सीबीआई ने पहली प्राथमिकी में दिल्ली के रोहिणी निवासी दिलीप कुमार और हैदराबाद के गुरुम वासु और गुरुम सतीश को आरोपित बनाया है, वहीं दूसरी प्राथमिकी में सज्जन सिंह, प्रभुलाल मीणा, राम अवतार और अमित कुमार शर्मा को नामजद किया है, जो सभी राजस्थान के रहने वाले हैं। अधिकारी के अनुसार, यह गिरोह राजस्थान से काम कर रहा था। पहला गिरोह 2010 से और दूसरा 2013 से सक्रिय था। नेटवर्क पाकिस्तान से आने वाली जानकारी के आधार पर कार्य कर रहा था। साथ ही "सट्टे के लिए प्रेरित कर" जनता के साथ भी धोखा कर रहा था।

बैंक अधिकारियों से मिलीभगत

अधिकारी ने बताया कि गिरोह के सदस्यों ने अज्ञात बैंक अधिकारियों के साथ साठगांठ कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खोले थे। एक ही व्यक्ति की कई जन्मतिथि दी गई थी। ये खाते बैंक कर्मियों की उचित जांच के बिना खोले गए। भारत से हुई कमाई विदेश पहुंचाई जाती थी। एजेंसी ने कहा है कि गिरोह के सदस्य भारत में आम लोगों से सट्टे की गतिविधि से मिली राशि विदेश में रह रहे साथियों को भी हवाला के जरिये भेजते थे। दिलीप के कई बैंक खाते थे। इनमें वर्ष 2013 से अब तक कुल 43 लाख रुपये आर्थिक नियमों का उल्लंघन कर घरेलू स्तर पर जमा कराए गए।

आरोपितों के खातों में करोड़ों रुपये जमा कराए गए

अधिकारी ने जांच में पाया गया कि गुरुम सतीश के छह बैंक खातों में घरेलू स्तर पर 4.55 करोड़ रुपये और विदेश से 3.05 लाख रुपये वर्ष 2012-20 के बीच जमा कराए गए। इसी अवधि में गुरुम वासु के खाते में 5.37 करोड़ रुपये जमा कराए गए। इनका ऐसा कोई कारोबार भी नहीं है जो इस लेनदेन को उचित ठहरा सके। पाकिस्तानी संदिग्ध के संपर्क में था राजस्थान का गिरोह राजस्थान से काम करने वाले गिरोह के काम करने का तरीका भी दिल्ली-हैदराबाद समूह की तरह ही था। ये भी हवाला के जरिये विदेश में अपने सहयोगियों को पैसे भेजते थे।

Posted By: Arvind Dubey