नईदिल्ली। बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमण दिखाई देने के बाद भारत में Tablighi Jammat इन दिनों भारत में चर्चा में है। वैसे अधिकांश लोग इस बात से अनजान हैं कि पाकिस्तानी क्रिकेट पर तो Tablighi Jammat का साया लंबे समय से रहा है। 2007 वर्ल्ड कप के दौरान जब पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कोच बॉब वूल्मर रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हुई थी तब भी Tablighi Jammat के प्रभाव वाले क्रिकेटरों का नाम उछला था।

Tablighi Jammat से जुड़े लोग पूरी दुनिया में इस्लाम का प्रचार प्रसार करते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तानी टीम में Tablighi Jammat की एंट्री इंजमाम उल हक के समय हुई थी। उन्होंने अपनी कप्तानी के दौरान तब्लीगी जमात से प्रभावित क्रिकेटरों को टीम में महत्व दिया। इंजमाम तो तब्लीगी जमात के प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं। अब मिस्बाह उल हक पाकिस्तान टीम के मुख्य सिलेक्टर हैं और वे भी इस जमात से जुड़े हैं।

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले साल इंग्लैंड में हुए वर्ल्ड कप के दौरान पाकिस्तानी टीम के सारे सूत्र इंजमाम उल हक के पास थे क्योंकि वे टीम के मुख्य सिलेक्टर थे। उन्होंने तब्लीगी जमात विचारधारा से जुड़े अधिकांश खिलाड़ियों को टीम में जगह दी थी। बढ़ी हुई दाढ़ी वाले इंजमाम जब कुर्ता-पायजामा पहनकर टीम के अभ्यास सत्र में पहुंचे थे तो विदेशी जर्नलिस्ट चौंक गए थे, उन्हें लगा था कि ये मौलाना मैदान में कैसे, बाद में उन्हें पता चला कि वो इंजमाम हैं। इस वर्ल्ड कप में भारत से हार के बाद पाकिस्तानी टीम विशेषकर कप्तान सरफराज अहमद और चीफ कोच इंजमाम की बहुत आलोचना हुई थी। इंजमाम पर तो 2017 चैंपियंस ट्रॉफी के लिए भी पक्षपातपूर्ण तरीके से तब्लीगी जमात से जुड़े क्रिकेटरों को टीम में चुनने के आरोप लगे थे।

इंजमाम जब टीम में खेलते थे तभी उन्होंने दाढ़ी बढ़ाना शुरू कर दिया था। उनका अधिकांश समय इबादत, अल्लाह और जमातों में बीतता। उनकी देखा देखी सईद अनवर, मिस्बाह उल हक और मुहम्मद युसूफ भी अपना अधिकांश समय जमात में बिताने लगे। उस समय जो खिलाड़ी तब्लीगी जमात से जुड़ने के लिए तैयार नहीं होते थे, उन्हें टीम में बने रहने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। कई बार तो पूरी टीम को जमात की प्रार्थना करते देखा गया था।

इसी वजह से शोएब अख्तर, यूनिस खान और अब्दुल रज्जाक को बार-बार अपनी काबिलियत साबित करनी पड़ती थी। युसूफ पहले ईसाई थे और मुसलमान बनने के बाद ही वह जमातों की शान हो गए थे। जमातों में ये इस्लाम के फायदे बताते और लोगों को सच्चा मुसलमान बनने को कहते हैं। अनवर, मिस्बाह, युसूफ को जो समय क्रिकेट को देना चाहिए था वो समय इनका तब्लीग और जमात में बीतने लगा।

2007 में वेस्टइंडीज में जब टीम के कोच बॉब वूल्मर की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हुई तब भी शक की सुई तब्लीगी जमात से जुड़े क्रिकेटरों पर उठी थी क्योंकि कोच की तत्कालीन कप्तान इंजमाम उल हक से पटती नहीं थी। उस दौरान तब्लीगी जमात के मौलाना भी टीम के साथ ठहरते थे। पाकिस्तानी मीडिया का मानना है कि तब्लीगी जमात के साए की वजह से पाकिस्तान का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब पहले जैसा दबदबा नहीं रह गया है।

Posted By: Kiran K Waikar

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