लंदन। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच लॉर्ड्स पर 14 जुलाई को हुए वर्ल्ड कप फाइनल के दौरान हुई ओवरथ्रो की घटना ने सभी का ध्यान आकर्षित किया था। मैच के अंतिम ओवर में बेन स्टोक्स के बल्ले से टकराकर गई गेंद पर इंग्लैंड को चार अतिरिक्त रन मिले और मैच सुपर ओवर में चला गया था। इसके बाद इंग्लैंड बाउंड्री काउंट के आधार पर पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बना था। क्रिकेट के नियम बनाने वाली संस्था मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने सोमवार को कहा कि इस घटना की अगले महीने (सितंबर में) समीक्षा की जाएगी।

अंतिम ओवर के दौरान जब इंग्लैंड को 3 गेंदों पर 9 रन चाहिए थे तब मार्टिन गप्टिल द्वारा बाउंड्री से फेंके गए थ्रो पर गेंद बेन स्टोक्स के बल्ले से टकराकर बाउंड्री के बाहर चली गई थी। इस गेंद पर इंग्लैंड को कुल 6 रन मिले थे और इसके बाद स्कोर टाई होने की वजह से मैच का फैसला सुपर ओवर में गया, जहां इंग्लैंड ने बाउंड्री काउंट के आधार पर जीत दर्ज कर पहली बार वर्ल्ड कप हासिल किया था।।

एमसीसी ने सोमवार को अपने बयान में कहा, वर्ल्ड कप फाइनल के मद्देनजर, वर्ल्ड क्रिकेट कमेटी (WCC) ओवरथ्रो से जुड़े नियम 19.8 की समीक्षा करेगी। डब्ल्यूसीसी का मानना है कि नियम साफ है लेकिन नियमों की उपसमिति सितंबर में इसकी समीक्षा करेगी।

न्यूजीलैंड के 241 रनों का पीछा करते हुए जब इंग्लैंड को 3 गेंदों पर जीत के लिए 9 रन चाहिए थे तभी गप्टिल के थ्रो पर गेंद डाइव लगा रहे बेन स्टोक्स के बल्ले से टकराकर बाउंड्री के बाहर चली गई थी। मैदानी अंपायर्स कुमार धर्मसेना और मरायस इरासमस ने इंग्लैंड को कुल 6 रन (दो बल्लेबाजों ने लिए और 4 ओवरथ्रो की वजह से) प्रदान किए थे। इसके बाद आईसीसी एलिट पैनल के पूर्व अंपायर साइमन टफैल ने कहा था कि नियमों के अनुसार इंग्लैंड को कुल 5 रन ही दिए जाने चाहिए थे क्योंकि जब गप्टिल ने थ्रो किया था तो बल्लेबाजों ने दूसरे रन के लिए एक-दूसरे को क्रॉस नहीं किया था।

एमसीसी की वर्ल्ड क्रिकेट कमेटी की रविवार को माइक गैटिंग की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इस कमेटी के सदस्य सौरव गांगुली निजी कारणों की वजह से इस बैठक में शामिल नहीं हुए थे।