नई दिल्ली। मास्टर ब्लास्टर Sachin Tendulkar के नाम एक और उपलब्धि जुड़ गई जब उन्हें Laureus Sporting Moment 2000-2020 Award से सम्मानित किया गया। Sachin Tendulkar को यह अवॉर्ड 2011 वर्ल्ड कप जीत के बाद उनके साथियों द्वारा कंधे पर उठाने के क्षण के लिए मिला। Sachin Tendulkar बर्लिन में सोमवार को पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ और महान टेनिस खिलाड़ी बोरिस बेकर के साथ इस अवसर पर मौजूद थे। बोरिस बेकर ने विजेता का नाम घोषित किया और स्टीव वॉ ने Sachin Tendulkar को ट्रॉफी प्रदान की।

Sachin Tendulkar की 2011 वर्ल्ड कप जीत के क्षण को टॉप 5 दावेदारों के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था और उन्हें सबसे ज्यादा वोट मिले। Sachin Tendulkar 2011 में अपना छठा और अंतिम वर्ल्ड कप खेल रहे थे। महेंद्रसिंह धोनी ने नुवान कुलसेकरा की गेंद पर छक्का लगाते हुए भारत को वर्ल्ड चैंपियन बनाया था। मुंबई में फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ जब जीत के साथ भारत ने वर्ल्ड कप जीता तो साथी खिलाड़ियों ने सचिन को कंधों पर उठा लिया था। उन्होंने इसी तरह ग्राउंड का चक्कर लगाया था और इस क्षण को फैंस आज तक भूले नहीं हैं।

सचिन तेंडुलकर ने कहा, मेरा सफर 1983 में शुरू हुआ जब मैं 10 साल का था। भारत ने वर्ल्ड कप जीता था, हर कोई पार्टी मना रहा था, इसलिए मैं भी जश्न में शामिल हो गया था। मैं जानता था कि कुछ खास हुआ है और मैं भी इसका अनुभव लेना चाहता था। यहां से मेरा सफर शुरू हुआ। 2011 वर्ल्ड कप ट्रॉफी को हाथों में उठाना मेरे जीवन का सबसे बड़ा क्षण था क्योंकि मैं 22 सालों से इसके लिए प्रयास कर रहा था। मैंने हिम्मत नहीं हारी थी और मैंने अपने पूरे देश की तरफ से उस ट्रॉफी को उठाया था।

46 साल के सचिन तेंडुलकर ने कहा कि लॉरियस स्पोर्टिंग ट्रॉफी हासिल करना गर्व का क्षण है। उन्होंने महान दक्षिण अफ्रीका नेता नेल्सन मंडेला के प्रभाव के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, 'मैं जब 19 साल का था तब मेरी नेल्सन मंडेला से मुलाकात हुई थी। उनका सबसे महत्वपूर्ण संदेश मुझे वह लगा था जब उन्होंने कहा था- खेल के पास सभी को एकजुट करने की शक्ति हैं।'

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Posted By: Kiran Waikar