पर्थ। भारतीय क्रिकेट टीम ने भले ही अभी तक विश्व कप में बेहतरीन प्रदर्शन किया हो लेकिन नॉकआउट चरण से पहले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और टीम प्रबंधन स्लॉग ओवरों में विकेटों के पतन की कमजोरी से पार पाना चाहेंगे।

पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने 45.2 ओवर में 2 विकेट पर 273 रन बना लिए थे लेकिन 49.2 ओवर तक स्कोर 7 विकेट पर 296 रन हो गया। भारत ने चार ओवरों और 23 रन के भीतर 5 विकेट गंवा दिए। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत ने 43.3 ओवर में दो विकेट पर 261 रन बना लिए थे लेकिन 48.5 ओवर में स्कोर 7 विकेट पर 302 रन हो गया। आखिर में कुल स्कोर 7 विकेट पर 307 रन रहा। भारत ने 5.1 ओवर में 41 रन के भीतर 5 विकेट गंवाए और दोनों मैचों में धोनी का योगदान 18-18 रन का रहा।

दक्षिण अफ्रीका को 130 रन से हराने के बाद धोनी ने इस पर अपने तरीके से सफाई दी। उनसे पूछा गया था कि क्या निचले क्रम के बल्लेबाज चौके-छक्के नहीं लगा पा रहे हैं। उन्होंने कहा था, यह कठिन है। सिर्फ हम ही नहीं बल्कि बाकी टीमों को भी परेशानी आ रही है। क्रीज पर जमने के बाद रफ्तार और उछाल से वाकिफ हो चुके बल्लेबाज ही रन बना सकते हैं। धोनी ने पुछल्ले बल्लेबाजों का बचाव करते हुए कहा था कि यदि बेहतर बल्लेबाजों को रफ्तार और उछाल का सामना करने में दिक्कत आ रही है तो उनके बाद आने वाले खिलाड़ियों को कसूरवार नहीं ठहराया जा सकता।

उन्होंने कहा कि यदि बल्लेबाज क्रीज पर जमा हुआ है तो आप उसे शॉट्स लगाने के लिए कह सकते हैं। जैसे कि जब मैं जडेजा के साथ क्रीज पर था तो हम तेजी से रन बना रहे थे। अश्विन या शमी के लिए 8, 9 या 10 रन प्रति ओवर की गति से रन बनाना मुश्किल है। ग्रुप लीग चरण में अब वेस्टइंडीज से बड़ा मुकाबला रह गया है और भारतीय कप्तान ने उम्मीद जताई कि तब तक यह समस्या सुलझ जाएगी। उन्होंने कहा- अधिक मैचों और हालात के अनुरूप हम और रन बनाना शुरू करेंगे। टीम प्रबंधन इसकी रणनीति बनाने में जुट गया है।

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