मल्टीमीडिया डेस्क। 90 के दशक में भारतीय क्रिकेट टीम में एक ऑलराउंडर बेहद चर्चित रहा। ये खिलाड़ी बाएं हाथ से बल्लेबाज, मध्यम तेज गति का गेंदबाज होने के अलावा अपनी शानदार और चुस्त फील्डिंग के लिए टीम में खास जगह रखता था। जी हां हम बात कर रहे हैं रॉबिन सिंह की। रॉबिन सिंह आज अपना 56वां जन्मदिन मना रहे हैं।

रॉबिन सिंह पहले विदेशी खिलाड़ी हैं जिन्होंने भारतीय टीम में जगह बनाई। टीम इंडिया से खेलने के लिए उन्होंने अपना देश भी छोड़ दिया था। बाद में ये खिलाड़ी भारतीय टीम के जुझारू खिलाड़ियों में शामिल रहा। उन्होंने भारत के लिए 136 वनडे मैच खेले। इनमें उनके नाम 2336 रन और 69 विकेट दर्ज हैं। रॉबिन अपने समय के बेहद चुस्त और बेहतरीन फील्डर रहे हैं। इस ऑलराउंडर की बदौलत भारत ने कई मैचों में जीत हासिल की।

बता दें कि रॉबिन सिंह का जन्म 14 सितंबर 1963 को त्रिनिदाद में हुआ। मूलतः रॉबिन सिंह का परिवार भारतीय ही है लेकिन करीब 150 साल पहले उनके पूर्वज वेस्टइंडीज में जाकर बस गए थे। उनका मूल नाम रामनारायण सिंह है। बाद में रॉबिन सिंह ने भारत की ओर से खेलने के लिए अपना देश भी छोड़ दिया था। उन्होंने 11 मार्च 1989 को भारत के लिए वनडे क्रिकेट में डेब्यू किया और फिर वे साल 2001 तक भारतीय टीम के लिए खेले।

पढ़ाई के लिए भारत आए थे

रॉबिन सिंह के पूर्वज करीब 150 साल वेस्टइंडीज जाकर बस गए थे। उन्होंने त्रिनिदाद में क्रिकेट खेलना शुरू किया। एक बार भारत से हैदराबाद ब्लू नाम की टीम वेस्टइंडीज में टूर्नामेंट खेलने गई, उस समय रॉबिन सिंह हैदराबद ब्लू के खिलाफ मैदान पर उतरे थे और शानदार प्रदर्शन किया था। उनके शानदार खेल के बाद इब्राहिम नामक व्यक्ति ने उन्हें भारत आकर खेलने का न्योता दिया। 1982 में रॉबिन पढ़ाई करने के लिए मद्रास (चेन्नई) आए। उन्होंने यहां की यूनिवर्सिटी से इकोनाॅमिक्स की डिग्री ली। उस समय उनकी उम्र 19 साल थी। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने खेलना भी जारी रखा। इसी दौरान उन्होंने प्रोफेशनल क्रिकेट का रुख किया और खेल के लिए उनकी गंभीरता बढ़ती गई। बाद में उन्होंने टीम इंडिया में स्थान बनाया।

खेल के लिए नागरिकता ली

रॉबिन सिंह का प्रोफेशनल क्रिकेट जारी रहा और फिर उन्होंने घरेलू क्रिकेट में प्रभावी प्रदर्शन कर भारतीय टीम के लिए दावा मजबूत किया। इसी दौरान उन्हें भारत की नागरिकता के लिए प्रयास शुरू कर दिए थे। 1989 में उन्हें भारत की नागरिकता मिली। इसके बाद टीम में उनके चयन का रास्ता साफ हुआ। वे चयनकर्ताओं को प्रभावित करने में सफल रहे और 1989 में ही वेस्टइंडीज दौरे के लिए भी उनका टीम इंडिया में चयन हुआ। ये संयोग ही रहा कि जिस देश में उनका जन्म हुआ, उसके खिलाफ ही उन्होंने डेब्यू किया। हालांकि वेस्टइंडीज के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू पर उन्होंने 2 वनडे खेले, पर इसके बाद वे टीम से 7 सालों के लिए बाहर रहे।

इस दौरान उन्होंने घरेलू और विदेश लीग में प्रभावी प्रदर्शन किया। इसके चलते ही वे एक बार फिर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचने में कामयाब रहे। लंबे इंतजार के बाद 1996 के टाइटन कप के लिए उन्हें भारतीय टीम में चुना गया। यहां से रॉबिन सिंह ने पीछे नहीं देखा। वे लगातार परफॉर्म करते रहे और उन्होंने टीम इंडिया में अपनी जगह पक्की कर ली। वे टीम में बतौर ऑलराउंडर शामिल किए गए और उन्होंने अपने चयन को सही भी साबित करके बताया।

वे टीम इंडिया के लिए वनडे मैचों के लिए जबर्दस्त खिलाड़ी रहे। बल्लेबाजी और गेंदबाजी के अलावा वे एक लाजवाब फील्डर के रुप में भी पहचाने गए। उनकी फील्डिंग विश्व स्तरीय रही। वे 2001 तक टीम का हिस्सा रहे। उन्होंने 3 अप्रैल 2001 को क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की। वनडे क्रिकेट का ये बेजोड़ खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट में नहीं दावा पेश कर पाया। उन्होंने भारत की ओर से केवल एक टेस्ट खेला। 1998 में उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ अपना पहला और आखिरी टेस्ट खेला ‌था।

कोचिंग शुरू की

क्रिकेट से संन्यास लेनने के बाद रॉबिन सिंह ने अपना कोचिंग करियर शुरू किया। साल 2004 में वे भारतीय अंडर 19 क्रिकेट टीम के कोच बने। फिर वे हांगकांग टीम के नेशनल कोच बने और 2006 में उन्होंने हांगकांग टीम को एशिया कप के लिए क्वालीफाई कराया। इसके बाद रॉबिन बतौर कोच भी सफल रहे हैं। इसके बाद वे भारत ए टीम के कोच बने। इस टीम में गौतम गंभीर, रॉबिन उथप्पा जैसे बड़े खिला‌ड़ी थे। साल 2007 में वे टीम इंडिया के फील्डिंग कोच बने। इसके अलावा रॉबिन सिंह आईपीएल फ्रेंचाईजी मुंबई इंडियंस और डेक्कन चार्जर्स से भी जुड़े।