इंदौर (गजेंद्र नागर)। मध्यप्रेदश क्रिकेट एसोसिएशन (MPCA) में अब तक कंधे पर बंदूक रखकर चलाने वाले अब तनाव में हैं। जिसके कंधे पर रखकर बंदुकें चलाई जा रही थीं, उन्होंने नाम उजागर करने की पेशकर कर माहौल बना दिया है। उल्लेखनीय है कि MPCA में बीते कई सालों से एक वरिष्ठ सदस्य शिकायतें करने के लिए विख्यात हैं। इनके निशाने पर दूसरे सदस्यों के साथ एमपीसीए कार्यालय में कार्यरत लोग भी लंबे समय से रहे हैं।

कुछ ऐसे चेहरे जो संगठन के सदस्य भी नहीं बने थे, लेकिन उन्हें भी इन्होंने नहीं छोड़ा। अब तक चर्चा थी कि इन्हें खबरें बताता कौन है, लेकिन बदलते सत्ता समीकरण के बीच इन्होंने खुद पत्र भेज ऐसे लोगों के नाम उजागर करने के संकेत दिए हैं, जो अंदरखानों की खबरें इन तक पहुंचाते थे। सूत्रों के अनुसार पत्र में कहा गया है कि MPCA के सदस्य ही अपने निजी हितों की संतुष्टि के लिए पर्दे के पीछे रहकर जानकारियां पहुंचाते थे। माना जा रहा है कि जानकारियां पहुंचाने वाले बहुत से चेहरे सत्ताधारी गुट के बड़े नाम हो सकते हैं क्योंकि अंदरखाने की खबरें सब तक नहीं पहुंचतीं। इस पत्र के बाद अब संगठन के सदस्यों में हडकंप मचा हुआ है।

MPCA सचिव संजीव राव से इस बारे में पूछने पर उन्होंने कहा- 'हां, कुछ समय पहले एक सदस्य का पत्र मिला था। जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं उन लोगों के नाम बता सकता हूं, जो शिकायतें पहुंचाते थे।'

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले भोपाल के एक वरिष्ठ सदस्य ने जूनियर चयन समिति में शामिल एक सदस्य की शिकायत करने की बाद कही थी, जो शासकीय नौकरी में हैं। नए संविधान के अनुसार शासकीय सेवक पदासीन नहीं हो सकता। माना जाता है कि इशारा होशंगाबाद के अनुराग मिश्रा की ओर था। मगर जिनके कंधे पर बंदूक चलाने की तैयारी थी, उन्होंने ई-मेल तो को किया, लेकिन बता दिया कि उनसे यह शिकायत किसने कराई है।

'बाहरी' खिलाड़ियों के चक्कर में मप्र पिछड़ा :

मप्र रणजी टीम के सत्र में खराब प्रदर्शन के बाद कई वरिष्ठ सदस्य नाखुश हैं। मप्र टीम 8 मैचों में 12 अंकों के साथ 18 टीमों के बीच 16वें स्थान पर रही। हालांकि बीता सत्र भी निराशाजनक रहा था, लेकिन इस बार भी गलतियों से सबक नहीं लिया गया। प्रदेश के विभिन्न संभागों में बाहरी प्रदेशों के खिलाड़ियों को खिलाने से भी सदस्य नाखुश हैं। क्रिकेट के गलियारों में चर्चा है कि चयन समिति में शामिल अनूप सबनीस मप्र क्रिकेट से सालों से दूर हैं। स्थानीय क्लब मैच भी कम देख पाते हैं। मगर सूत्रों के अनुसार टीम चयन के अलावा बल्लेबाजी क्रम तय करने में भी हस्तक्षेप की कोशिश रही, जिसे प्रशिक्षकों ने नकार दिया। आनंदसिंह बैस और रजत पाटीदार जैसे कुछ नाम बिना बल्ला चलाए ही टीम में जब तक जगह बनाते रहे। आनंद ने 3 मैचों की पांच पारियों में 75 रन बनाए। उनका औसत 15 का रहा। वे कई साल पहले पदार्पण कर चुके हैं। अभी तक कोई पचासा भी उनके नाम नहीं है। मगर टीम में कैसे रास्ता बनाते हैं, यह चर्चा का विषय है।

रजत प्रतिभाशाली हैं, लेकिन सात मैचों की 11 पारियों में 175 रन बना सके। औसत रहा 15.90 का। इनसे ज्यादा औसत तो तेज गेंदबाज आवेश खान का रहा। अंडर-23 टीम में जोरदार प्रदर्शन कर रहे देव बरनाले और आशुतोष शर्मा जैसे कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपनी बारी का ही इंतजार करते रहे। पार्थ साहनी जैसे हरफनमौला को सिर्फ टी-20 तक समेट रखा है। दो सत्र पहले रणजी टीम में चुना जरूर गया था, लेकिन मैदान पर नहीं उतारा।

इन दिनों ग्वालियर और चंबल सहित कुछ संभागों के रास्ते मप्र टीम में जगह बनाने के लिए बाहरी प्रदेश के खिलाड़ी चले आ रहे हैं। यह सभी वर्गों की टीमों में चल रहा है। इससे मप्र के खिलाड़ियों में निराशा है। सूत्रों के अनुसार चयन समिति में भी गुट हैं, जो पसंदीदा खिलाड़ियों पर खास ध्यान देते हैं। यही नहीं दो चयनकर्ताओं के बीच तो विवाद भी हो चुका है और दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत की। शुभम शर्मा को वनडे और टी20 टीमों में नहीं लिया, लेकिन रणजी टीम का कप्तान बना दिया। वे इसमें प्रभावी नहीं रहे। इस सत्र में अच्छा खेलने वाले नमन ओझा को अचानक बैठाना भी हैरानी भरा रहा। इस सत्र में मप्र की ओर से सिर्फ चार शतक लगे, जिसमें एक नमन का था।

Posted By: Kiran Waikar