जालंधर, एजेंसी। सचिन तेंदुलकर ने शानदार अर्धशतकीय पारी खेली हो और टीम का कोच उन्हें देखकर मुंह फेर ले ऐसा शायद ही देखने को मिले लेकिन आज से लगभग 20 साल पहले जालंधर के बर्लटन पार्क स्टेडियम में ऐसा वाकया सामने आया था, जब भारत के तत्कालीन कोच अजित वाडेकर इस स्टार बल्लेबाज ने नाखुश नजर आए थे।

यह वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच भारत और श्रीलंका के बीच 20 फरवरी 1994 को खेला गया था जिसमें तेंदुलकर 52 रन बनाकर रन आउट हो गए थे। दर्शकों को उस दिन इंतजार था कि तेंदुलकर वनडे में अपना पहला शतक इस मैदान पर लगाएं लेकिन मुंबई के इस बल्लेबाज के पवेलियन लौटने से उन्हें निराशा हुई थी।

जालंधर जिला क्रिकेट एसोसिएशन (जेडीसीए) के सचिव सुरजीत राय बिट्टा ने इस मैच की यादों को ताजा किया। उन्होंने कहा कि नवजोत सिद्धू तथा अजय जडेजा ने भारत को ठोस मगर धीमी शुरुआत दी थी। रन रेट बहुत कम था। विनोद कांबली और प्रवीण आमरे के जल्दी आउट होने के बाद सचिन तेंदुलकर बल्लेबाजी करने आए और रन रेट बढ़ाने की कोशिश की।

बिट्टा ने बताया कि मैच की स्थिति देख कर अजित वाडेकर बहुत परेशान थे। इसी बीच सचिन रन आउट होकर पवेलियन लौट गए। वाडेकर ने कड़क आवाज में पूछा - क्या हुआ। सचिन ने कहा रन रेट बढ़ाने के प्रयास में रन आउट हो गया। इसके बाद वाडेकर ने सचिन की ओर मुंह फेर दिया था। उन्होंने कहा कि सचिन चार विकेट गिरने के बाद आए थे और आठवें विकेट के रूप में वापस गए। इस बीच उन्होंने अहजर (11), नयन मोंगिया (3) और श्रीनाथ (7) तथा राजेश चौहान (26 नाबाद) के साथ मिल कर स्कोर को 209 तक पहुंचाया था।

बिट्टा के अनुसार आउट होने से पहले तेंदुलकर ने अच्छी बल्लेबाजी की। विकेटों के बीच सधी हुई दौड़ लगाई। विकेटों के बीच की दौड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया सकता है कि पारी में उन्होंने केवल तीन चौके लगाए थे और भारत का स्कोर सम्मानजनक स्थिति तक पहुंचाया था। सचिन के बारे में पूछने पर बिट्टा ने कहा कि मैं वहीं मौजूद था। वाडेकर की मौन फटकार के बावजूद सचिन पूरी तरह शांत थे और फील्डिंग में भी उन्होंने अपना स्वाभाविक खेल दिखाया। तेंदुलकर ने गेंदबाजी भी की और श्रीलंकाई बल्लेबाज रूवान कल्पगे को मोंगिया के हाथों स्टंप करवाया था।

उन्होंने कहा कि न केवल हम लोगों को बल्कि मुझे लगता है कि उस दिन जो भी दर्शक स्टेडियम में मौजूद थे उन सबको इस बात का दुख था कि सचिन शतक नहीं लगा पाए। बिट्टा की राय सहमति जताते हुए मैच के आयोजकों में शामिल तथा पंजाब के पूर्व क्रिकेटर राकेश राठौड़ ने कहा कि सबको इस बात का भरोसा था कि सचिन शतक लगाएंगे लेकिन वह रन आउट हो गए थे। इसका आज भी हम सबको दुख है। इससे जालंधर के नाम पर यह खास रिकार्ड दर्ज हो जाता कि तेंदुलकर ने अपना पहला वनडे शतक यहां लगाया था।

राष्ट्रीय चयन समिति के सदस्य विक्रम राठौड के भाई तथा शहर के पूर्व महापौर राकेश ने कहा कि सचिन बहुत ही शांत और विनम्र खिलाड़ी हैं। उस रात को मैच के बाद डिनर के दौरान जब उनके प्रसंशक आए तो उन्होंने सबके साथ तस्वीरें खिंचवाई थी। किसी को भी निराश नहीं लौटाया। श्रीलंका ने बारिश से प्रभावित यह मैच चार विकेट से जीता था।

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