Success Story: टोक्यो पैरालंपिक 2020 में रविवार के दिन सिल्वर मेडल जीतकर नोएडा के DM सुहास एलवाई ने कमाल कर दिया है। सुहास पहले प्रशासनिक अधिकारी हैं, जिन्होंने पैरालिंपिक में भाग लिया है और अब उन्होंने देश के लिए पदक भी जीता है। बैडमिंटन मेंस सिंगल्स एसएल4 के फाइनल मुकाबले में सुहास एलवाई को फ्रांस के लुकास माजुर के खिलाफ 21-15, 17-21, 15-21 से हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही उनके गोल्ड जीतने की उम्मीद खत्म हो गई। हालांकि इस हारके बावजूद उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया।

पैरालिंपिक की शुरुआत से सुहास काफी चर्चा में रहे हैं। अब तक देश के अधिकतर लोग उनके बारे में जानने लगे हैं, लेकिन उनकी पत्नी ऋतु सुहास के बारे में कम ही लोगों को पता है। ऋतु भी अपने पति की तरह प्रशासनिक अधिकारी हैं और मिसेज इंडिया-2019 का खिताब भी जीत चुकी हैं। अपने पति की जीत पर उन्होंने बहुत खुशी जताई है और उनके संघर्ष के बारे में भी बताया है।

2016 से हुई सुहास की शुरुआत

सुहास ने साल 2007 में IAS बने थे। उन्हें बैडमिंटन का शौक इससे पहले से था। IAS बनने के बाद भी उन्होंने अपने खेल के लिए समय निकाला और लगातार प्रैक्टिस करते रहे। साल 2008 में उन्होंने ऋतु सुहास के साथ शादी की। उनके ऊपर परिवार और प्रशासन की कई अहम जिम्मेदारियां थी, लेकिन इन सब के बावजूद उन्होंने अपने खेल के लिए समय निकाला। उनकी इस मेहनत का फल साल 2016 में मिला, जब उन्होंने चीन में आयोजित एशियन चैंपियनशिप के मेंस सिंगल में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता। यहीं से सुहास के बड़ा बनने की शुरुआत हो चुकी थी।

रोज 8 से 12 बजे तक करते थे प्रैक्टिस

सुहाल एलवाई की पत्नी ऋतु सुहास ने बताया कि उन्होंने पैरालिंपिक में खेलने के लिए अपने जीवन के कीमती 6 साल समर्पित कर दिए। यह सिल्वर मेडल उसी का नतीजा है। सुहास रोजाना 8 बजे से 12 बजे तक बैडमिंटन की प्रैक्टिस करते थे। इसी वजह से लगातार उनके खेल में निखार आया। उनके कोच ने भी उनकी काफी मदद की। लॉकडाउन के समय भी उन्होंने अपनी प्रैक्टिस जारी रखी और टोक्यो पैरलिंपिक में देश का नाम रोशन किया है।

अपने पति से कम नहीं हैं ऋतु सुहास

सुहास एलवाई की पत्नी ऋतु सुहास भी अपने पति से कम नहीं हैं। ऋतु भी प्रशासनिक अधिकारी हैं और फिलहाल गाजियाबाद में एडीएम एडमिनिस्ट्रेशन के पद पर तैनात हैं। ऋतु अक्सर सामाजिक जागरूकता के लिए कार्यक्रम करती रहती हैं। उन्होंने साल 2019 में मिसेज इंडिया का खिताब भी जीता था। साल 2008 में सुहास एलवाई के साथ शादी करने के बाद ऋतु दो बच्चों की मां भी बन चुकी हैं। बच्चों के अलावा प्रशासनिक जिम्मेदारी होने के बावजूद ऋतु समाजसेवा के लिए समय निकाल लेती हैं।

ध्वस्त किया था मुख्तार अंसारी का किला

गाजियाबाद में ADM बनने से पहले ऋतु सुहास लखनऊ विकास प्राधिकरण में जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर तैनात थीं। उस समय राज्य सरकार माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही थी। सरकार के निर्देश पर ऋतु ने अवैध रूप से बनी जियामऊ की दो इमारतें, ड्रैगन मॉल और रानी सल्तनत में अवैध निर्माण को जमींदोज करवा दिया था। ये सभी इमारतें डॉन मुख्तार अंसारी की थीं।

पत्नी की जीत सके बाद बताई संघर्षों की कहानी

टोक्यो पैरालंपिक में सुहास के पदक जीतने के बाद ऋतु ने उनके संघर्षों की कहानी बताई है। उन्होंने कहा "देश के लिए पैरालंपिक में खेलना उनका सपना था। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी जिंदगी के कीमती 6 साल समर्पित कर दिए। जब वे पैरालंपिक में जा रहे थे तो मैंने उन्हें यही कहा था कि नतीजे की चिंता किए बिना वे बस अपना बेस्ट गेम खेलें और उन्होंने वही किया। सुहास की इस कामयाबी का श्रेय केवल उनकी मेहनत को जाता है और किसी को नहीं। मेरे पति ने खेलों को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा प्राथमिकता दी है। उसी की वजह से वे आज इस मुकाम पर हैं। मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं कि वे जिंदगी में इसी तरह आगे बढ़ते रहें।"

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Posted By: Arvind Dubey