World Boxing Championship 2022। वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2022 जीतकर निकहत जरीन ने भारत की बेटियों, विशेषकर मुस्लिम समाज के युवतियों के मिसाल कायम की है। विश्व विजेता बनने के सफर में निकहत जरीन को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। निकहत के लिए बॉक्सिंग में करियर चुनना आसान काम नहीं था क्योंकि बॉक्सिंग के दौरान छोटे कपड़े (शॉर्ट्स) पहने का सबसे पहले रिश्तेदारों व मुस्लिम धर्म से जुड़े लोगों ने विरोध किया लेकिन निकहत के माता-पिता ने इसकी परवाह नहीं की और बेटी को बॉक्सिंग के लिए प्रोत्साहित किया।

पिता ने चारों बेटियों को करियर चुनने की दी आजादी

निकहत जरीन के पिता भी पूर्व फुटबॉलर व क्रिकेटर रह चुके हैं। उन्होंने अपनी चारों बेटियों को करियर चुनने की आजादी दी। निकहत जरीन के दो बेटियां डॉक्टर हैं, वहीं निकहत ने खेल में करियर बनाना चाहा। जब निकहत स्टेट चैंपियन बनी तो चाचा की सलाह पर बॉक्सिंग रिंग में आ गईं। 14 साल की उम्र में निकहत जरीन जब वर्ल्ड यूथ बॉक्सिंग चैंपियन बनीं तो परिवार में खुशी की लहर छा गई।

कंधे में चोट लगी तो रिंग से 1 साल बाहर रही

भारतीय मुक्केबाजी में जब स्टार खिलाड़ी मैरीकॉम के सितारे बुलंद थे, तब निकहत जरीन उभर रही थी। दुनिया जीतने के सपने को पूरा करने के लिए रोज रिंग में पसीना बहा रही थी, लेकिन तभी साल 2017 में कंधे में चोट के कारण निकहत को करीब 1 साल रिंग से बाहर रहना पड़ा। अपने गोल्डन टाइम में निकहत के लिए यह समय गंवाना बहुत भारी पड़ा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों के लिए राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिली। लेकिन असफलता के बाद भी पिता और परिवार का पूरा सहयोग मिलने से निकहत का मनोबल नहीं टूटा।

थाईलैंड की जितपांग जुतामास को दी शिकस्त

5 साल तक कंधे में दर्द और कई असफलताओं से मुकाबला करने के बाद निकहत जरीन ने गुरुवार को विश्व मुक्केबाजी चैंपियन बनकर इतिहास रच दिया। उन्होंने थाईलैंड की जितपांग जुतामास को हराकर वर्ल्ड चैंपियन का खिताब जीत लिया।

बेटी को मुस्लिम लड़कियों के लिए मिसाल मानते हैं पिता

बेटी निकहत जरीन की इस सफलता से पिता सबसे ज्यादा खुश हैं। पिता जमील का कहना है कि मेरी बेटी भारतीय मुस्लिम लड़कियों के लिए एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतना मुस्लिम लड़कियों के साथ-साथ देश की हर लड़की को प्रेरणा देगी। निकहत के चाचा समसमुद्दीन के बेटे एतेशामुद्दीन और इतिशामुद्दीन ने भी करियर के लिए बॉक्सिंग को चुना है और बहन को अपनी प्रेरणा बताया है। वहीं निकहत की सबसे छोटी बहन बैडमिंटन में हाथ आजमा रही है।

पिता जमील का कहना है कि बॉक्सिंग जैसे खेल के लिए बेटी की परवरिश करना आसान नहीं था। वह बताते हैं कि इस खेल में लड़कियों को शॉर्ट्स और ट्रेनिंग शर्ट पहनने की आवश्यकता होती है, लेकिन उनके परिवार के लिए यह आसान नहीं था। रिश्तेदार के साथ साथ कई धार्मिक रूढ़िवादिता वाले लोगों ने इसका विरोध किया।

Posted By: Sandeep Chourey

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