नई दिल्ली। लंबे जद्दोजहद के बाद आखिरकर दिल्ली विधानसभा में शुक्रवार को जनलोकपाल बिल पास कर दिया गया। इसके लिए पहले विधनसभा में बहस हुई और उसके बाद इसे बहुमत से पारित किया गया। आम आदमी पार्टी की तरफ से ही ये विधेयक लाया गया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने समाजसेवी अन्ना हजारे की तरफ से दिए गए दो सुझावों को शामिल करते हुए इस विधेयक में संसोधन कर इसे विधानसभा में पेश किया। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस विधेयक को भ्रष्टाचार को खत्म करनेवाला बताया। हालांकि, अब इस विधेयक को उपराज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद संसद की भी मंजूरी मिलनी बाकी है।

इस नए विधेयक के मुताबिक, अब लोकपाल के सेलेक्शन पैनल में हाइकोर्ट के एक और जज और एक विशिष्ट व्यक्ति को शामिल किया गया है। साथ ही लोकपाल के हटाने की प्रक्रिया हाईकोर्ट की निगरानी में हुई जांच के बाद ही शुरू होगी। प्रशांत भूषण ने इन दो मुद्दों पर आपत्ति जताई थी, जिसके अंतर्गत बहाली और पद से हटाने के नियमों में बदलाव के सुझाव हैं।

ये फ़ैसला दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता वाली कैबिनेट मीटिंग में लिया गया था। इस बदलाव के साथ ही सेलेक्शन पैनल में अब एक और हाईकोर्ट जज और एक एक्सपर्ट होंगे। इसके साथ ही लोकपाल के ऊपर अभियोग तभी लाया जा सकेगा जब हाईकोर्ट में उसके ख़िलाफ़ आरोपों की जांच शुरू हो गई हो। ये वो बिंदु थे जिसके बिल में नहीं होने पर पूर्व आप नेता प्रशांत भूषण ने गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे महा-जोकपाल कहा था।

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