सूरत। गुजरात में सूरत जिले के बारडोली से लेकर व्यारा रेलवे स्टेशन के बीच दोहरीकरण का कार्य चल रहा है। इस सेक्शन में रेलवे की पटरियों पर दौड़ता एक ट्रैक्टर आम लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। ठेकेदार ने जुगाड़ से माल-सामान की ढुलाई के लिए यह अस्थाई व्यवस्था की है। रेलवे अब व्यारा से मढ़ी और मढ़ी से बारडोली के बीच दोहरीकरण का कार्य कर रही है।

व्यारा से बारडोली के बीच तीन बड़े और दो छोटे स्टेशन लोटरवा, कहर, मढ़ी, मांगरोलिया, टिम्बरवा आते हैं। इसी सेक्शन में एक ठेकेदार ने माल-सामान की ढुलाई के लिए विशेष ट्रैक्टर बनवाया है। यह ट्रैक्टर रेल पटरियों पर दौड़ता दिखाई देता है। आम ट्रैक्टर के इंजन और बॉडी में बिना बदलाव किए उसके पहिए बदल दिए गए हैं। टायर और ट्यूब की जगह ट्रेनों में उपयोग में लिए जाने वाले लोहे के छोटे-बड़े पहिए लगा दिए गए हैं। ट्रैक्टर के पीछे ट्रॉली भी लगी हुई है। उसके पहियों में भी बदलाव किया गया है। जुगाड़ से निर्मित इस ट्रैक्टर को देखकर लोग रोमांचित हो रहे हैं।

इसमें कुछ गलत नहीं: रेलवे

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ठेकेदार का यह जुगाड़ हर किसी को हैरत में डाल देता है, लेकिन उसमें कुछ गलत नहीं है। समय-समय पर रेलवे संपत्ति की नीलामी होती है। ठेकेदार ने ट्रेनों के छोटे और बड़े पहियों को नीलामी में खरीद लिया। उन पहियों को मैकेनिक से ट्रैक्टर में फिट करवा लिया। यह ट्रैक्टर सामान्य गति से रेलवे ट्रेक पर दौड़ता दिखाई देता है। दो स्टेशनों के बीच जंगल-झाड़ियों में दोहरीकरण का कार्य पूरा करने में काफी दिक्कत आती है। सामान की ढुलाई मुख्य समस्या है, जिसमें इस तरह का जुगाड़ कार्य आसान बना देता है।

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