नई दिल्ली। प्ले स्टोर पर उपलब्ध तमाम मोबाइल एप्स में से ये तय करना अब काफी मुश्किल हो गया है कि, इनमें से असली कौन सी है और नकली कौन सी। दरअसल, प्ले स्टोर Update for Samsung – Android Update Versions नाम की एक ऐप मौजूद है। इस फेक ऐप ने लगभग 10 मिलियन से अधिक यूजर्स जो कि सैमसंग का पुराना स्मार्टफोन इस्तेमाल कर रहे थे उनको अपडेट का लालच देकर उनसे पैसे ऐंठ लिए। फेक ऐप के जरिए ये दावा किया गया था कि, इसे डाउनलोड करने और अप्लाई करने से आपके स्मार्टफोन को लेटेस्ट सॉफ्टवेयर वर्जन का अपडेट मिलेगा। इस फर्जी ऐप के अपडेट पर क्लिक करने के बाद आप एक पेज पर चले जाते हैं, जहां अपडेट डाउनलोड करवाने के लिए यूजर्स से पैसे लिए जाते हैं।

दरअसल, एंड्रॉयड स्मार्टफोन्स में एक वक्त के बाद सॉफ्टवेयर अपडेट मिलने बंद हो जाते हैं। ऐसा अक्सर पुराने स्मार्टफोन्स में होता है। जैसे-जैसे फोन का मॉडल पुराना होता जाता है, वैसे ही गूगल उसमें अपडेट रोक देता है। ऐसे में कई यूजर्स सीधे गूगल प्ले स्टोर से फोन अपडेट करने के बारे में सोचते हैं। ZDNet की रिपोर्ट के मुताबिक सिक्योरिटी रिसर्चर और मैलवेयर अनालिस्ट Aleksejs Kuprins ने कहा है कि उन लोगों को जज करना गलत होगा जो गलती से प्ले स्टोर पर अपने स्मार्टफोन के अपडेट के लिए जाते हैं। वेंडर्स आमतौर पर Android OS में कई सॉफ्टवेयर देते हैं, जिससे यूजर्स का कन्फ्यूजन बढ़ता है और वे इस तरह के फेक ऐप के चक्कर में फंस जाते हैं

-सिक्योरिटी रिसर्चर ने कहा है कि ये मैलवेयर नहीं है और न ही यूजर का डेटा चोरी करता है। लेकिन ये एक तरह का स्कैम है और फ्रॉड ऐप है। आप इसे ऐडवेयर भी कह सकते हैं क्योंकि इस ऐप मे कई विज्ञापन हैं, जिसके जरिए आपसे पैसों की मांग की जाती है। लेकिन, कई केस में जब यूजर ने पैसे देकर फोन अपडेट करने की कोशिश की तो ये प्रोसेस कंपलीट नहीं हुआ और यूजर के पैसे डूब गए।

-बता दें कि, किसी एंड्रॉयड स्मार्टफोन या आईफोन को अपडेट करने के लिए यूजर्स को प्ले स्टोर या ऐप स्टोर पर जाने की जरूरत नहीं होती है। स्मार्टफोन यूजर्स को सॉफ्टवेयर अपडेट फोन की Setting में जाकर System Updates ऑप्शन मिलता है, जहां से आप अपना फोन अपडेट कर सकते हैं। Google Play स्टोर में पहले उपलब्ध इस फेक ऐप को सैमसंग-एंड्रॉइड अपडेट वर्जन के लिए अपडेट कहा जाता था। हालांकि, इस ऐप का सैमसंग कंपनी या सैमसंग फोन से कोई लेना-देना नहीं था।

-सीएसआईएस सिक्योरिटी ग्रुप के मैलवेयर विश्लेषक हॉफस कुप्रिन्स ने जेडनेट से कहा, "मैंने Google Play Store से संपर्क किया है और उनसे इस ऐप को हटाने पर विचार करने के लिए कहा है।" जाहिर है कि Google ने कुप्रिन्स द्वारा किए गए अनुरोध पर काम किया है क्योंकि ऐप अब प्ले स्टोर पर उपलब्ध नहीं है।