Common Mobile Charger in India । यूरोपीय संघ 2024 तक स्मार्टफोन, टैबलेट, पोर्टेबल स्पीकर और ई-रीडर सहित विभिन्न उपकरणों को बिजली देने के लिए common charger के रूप में यूएसबी-सी पोर्ट को अपनाने की घोषणा कर चुका है। यूरोपीय यूनियन के बाद अब अमेरिकी सांसदों ने भी वाणिज्य विभाग से ऐसा ही कदम उठाने के लिए कहा है। हाल ही में सीनेटर एड मार्के (डी-एमए), एलिजाबेथ वारेन (डी-एमए) ने एक पत्र लिखकर मांग की है कि अमेरिका में सभी मोबाइल उपकरणों में एक सामान्य चार्जिंग पोर्ट की आवश्यकता के लिए एक रणनीति विकसित की जानी चाहिए। ऐसे में सवाल यह उठता है कि भारत में इस बारे में कदम उठाया जाएगा।

हर डिवाइस के लिए अलग चार्जर के परेशानी

गौरतलब है कि भारत में भी अलग-अलग डिवाइस को चार्ज करने के लिए अलग-अलग तरह के चार्जर का इस्तेमाल करना पड़ता है। ऐसे में डिवाइस यूजर्स को कई बार परेशानियों को सामना करना पड़ता है। यदि कॉमन चार्जर रहता है तो यूजर कहीं भी अपनी डिवाइस को चार्ज कर सकते हैं। आपको बता दें कि यूरोपीय संघ ने उपभोक्ता और पर्यावरण के मुद्दे को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक हित में कॉमन चार्जर की व्यवस्था को मंजूरी दे चुका है।

एक यूजर के पास होते हैं औसतन तीन चार्जर

गौरतलब है कि सामान्य तौर पर एक उपभोक्ता के पास करीब 3 मोबाइल फोन चार्जर होते हैं और 40 फीसदी यूजर की ये शिकायत रहती है कि वे अपने मोबाइल फोन को चार्ज नहीं कर सके क्योंकि उनकी डिवाइस से संबंधित चार्जर समय पर उपलब्ध नहीं था।

अलग-अलग चार्जर के कारण पैदा हो रहा ई-कचरा

आपको बता दें कि साल 2019 में 53.6 मिलियन मीट्रिक टन ई-कचरा पैदा हुआ था। इसमें से सिर्फ 17 ई-कचरे का ही फिर से उपयोग संभव हो पाया। ऐसे चार्जर जिन्हें फेंक दिया जाता है या कभी इस्तेमाल नहीं किया जाता है, वे सालाना 11,000 टन से अधिक ई-कचरा पैदा करते हैं।

Posted By: Sandeep Chourey

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