नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अपनी स्थापना का 50वां साल मना रहा है। डॉ. विक्रम साराभाई ने 15 अगस्त 1969 को इसरो की स्थापना की थी। इसके बाद एक बैलगाड़ी पर लाए गए पहले सैटेलाइट से लेकर बाहुबली के कंधों पर चंद्रयान-2 भेजने तक इसने एक लंबा सफर तय करते हुए दुनिया के सामने भारत का मान बढ़ाया है। इसरो की तरफ दुनिया के कईं देश आज सिर्फ इसलिए देख रहे हैं कि तकनीक के साक कम खर्च में केवल इसरो ही उनके सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में भेज सकता है।

ISRO और भारत का पहला रॉकेट

ISRO का सफर कभी थुंबा से शुरू हुआ था और आज बहुत आगे निकल गया है। 21 नवंबर 1963 को भारत का पहला रॉकेट केरल के थुंबा से छोड़ा गया था। उस वक्‍त दुनिया के दूसरे बड़े मुल्‍कों को इस बात का अहसास भी नहीं रहा होगा कि भविष्‍य में भारत उनसे इतना आगे निकल जाएगा कि उसको पकड़ पाना भी मुश्किल होगा।

इसरो ने अपनी विश्‍वसनीयता को बरकरार रखते हुए पूरी दुनिया में अपना झंडा बुलंद कर दिया है। उपलब्धियों के लिहाज से यह साल भी इसरो के लिए बड़ा रहा है। चंद्रयान-2 के सफलता पूर्वक लॉन्च होने के बाद चांद की तरफ बढ़ते कदम इसकी गवाही दे रहे हैं।

यहां देखिए तब से लेकर अब तक इसरो का सफर

1969: 15 अगस्त 1969 को इसरो की स्थापना हुई

1971: श्रीहरिकोटा में स्पेस स्टेशन, जिसे आज सतीश धवन स्पेस सेंटर के नाम से जाना जाता है।

1975: 19 अप्रैल को इसरे ने देश का पहला सैटेलाइट आर्यभट्ट लॉन्च किया। वहीं 1 अगस्त को शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारत द्वारा पहला साल भर के लिए सैटेलाइट इंस्ट्रक्शनल टेलीविजन एक्सपेरिमेंट किया गया।

1977: सैटेलाइट टेलिकम्यूनिकेशन एक्सपेरिमेंट प्रोजक्ट(STEP) शुरू हुआ जो टीवी को हर गांव तक लेकर गया।

1979: 7 जून को पहला अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लॉन्च किया गया वहीं 10 अगस्त को पहले सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल का एक्सपेरिमेंट हआ।

1980: देश के वैज्ञानिकों ने पहला स्वदेशी उपग्रह एसएलवी-3 लांच किया था। यह 18 जुलाई 1980 को लांच किया गया था। इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर पूर्व राष्ट्रपति श्री डॉक्टर अब्दुल कलाम थे।

1981: 19 जून को इसरो का पहला कम्प्यूनिकेशन सैटेलाइट ऐपल ऐरीन रॉकेट की मदद से लॉन्च किया गया।

1982: 10 अप्रैल को भारत कम्यूनिकेशन, ब्रॉडकास्टिंग और मौसम की जानकारी के लिए INSAT-1A लॉन्च।

1987: 24 मार्च को इसरो ने एसएलवी से बेहतर एडवांस एसएलवी लॉन्च किया।

1988: भारत का पहला रिमोट सेंसिंग जासूसी उपग्रह लॉन्च किया गया जिसका नाम था IRS-1A

1993: 20 सितंबर को इसरो ने अपने पहले डेवलमेंटल PSLV को लॉन्च किया।

2000: इस साल की शुरुआत से अगले 10 साल तक के लिए जीएसएलवी क्लास रॉकेट के पूर्ण उपयोग और टेस्टिंग शुरू हुई।

2001: GSLV ने GSAT-1 को ऑर्बिट में पहुंचाया।

2008: यह वो साल था जब भारत ने इतिहास रचते हुए 22 अक्टूबर को चंद्रयान का सफल प्रक्षेपण कर दुनिया का चौंकाया।

2013: 16 नवंबर 2013, को अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में भारत ने एक नया अध्याय लिखा। इस दिन 2:39 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से PSLV C-25 मार्स ऑर्बिटर (मंगलयान) का अंत‍रिक्ष का सफर शुरू हुआ। 24 सितंबर 2014 को मंगल पर पहुंचने के साथ ही भारत इस तरह के अभियान में पहली ही बार में सफल होने वाला पहला देश गया।

2017: 16 फरवरी 2017 को इसरो ने एक साथ अंतरिक्ष में एक ही रॉकेट से 104 सेटेलाइटों को लॉन्च कर दुनियाभर में अपना लोहा मनवाया।

2018: GSLV- MkIII को ऑपरेशनल घोषित किया गया, इसी का नाम बाहुबली रखा गया जिसपर सवार होकर चंद्रयान-2 ने उड़ान भरी है।

2019: 22 जुलाई 2019 को चंद्रयान 2 लॉन्च किया गया जो 7 सितंबर को चांद की सतह पर उतरेगा।

इसरो की भावी योजनाएं

इसरो की अगली बड़ी योजना सौर प्रभामंडल (कोरोनाग्राफ के साथ – एक टेलीस्कोप), फोटोस्फेयर, वर्णमण्डल (सूर्य की तीन प्रमुख बाहरी परतें) और सौर वायु का अध्ययन करने के लिए सूर्य में वैज्ञानिक मिशन भेजना है।

श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी-एक्सएल द्वारा इसे 2020 में छोड़ा जाना है। आदित्य-एल1 उपग्रह कक्षा से सूर्य का अध्ययन करेगा जो पृथ्वी से करीब 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर है। आदित्य-एल1 मिशन इस बात की जांच करेगा कि क्यों सौर चमक और सौर वायु पृथ्वी पर संचार नेटवर्क और इलेक्ट्रॉनिक्स में बाधा पहुंचाती है।

इसरो की उपग्रह से प्राप्त उन आंकड़ों का इस्तेमाल करने की योजना है ताकि वह गर्म हवा और चमक से होने वाले नुकसान से अपने उपग्रहों का बेहतर तरीके से बचाव कर सके। जल्द ही भारत पहली बार शुक्र ग्रह का भी उपयोग करेगा और संभवतः 2021-2022 के दौरान दूसरे मंगल ओर्बिटर मिशन के साथ लाल ग्रह पर लौटेगा। उसकी मंगल की धरती पर रोबोट रखने की योजना है।