मल्टीमीडिया डेस्क। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने केबल टीवी और डायरेक्ट टू होम कंपनियों के लिए नए नियम जारी किए हैं। इन नियमों के आधार पर कंपनियों को 15 जनवरी तक अपनी वेबसाइट पर चैनल्स के नए पैक की जानकारी देनी होगी वहीं यह नए नियम 31 मार्च 2020 से लागू होंगे। हम आपको बताते हैं कि ट्राई ने जो नए नियम बनाए हैं वो पिछले साल लागू हुए नियमों से कितने अलग हैं और इसका क्या असर आप पर होगा।

यह हैं नए नियम, पुराने से क्या है अलग

- नए नियमों के अनुसार अब ग्राहकों के लिए दो स्लैब्स बने हैं। इनमें से एक में टैक्स मिलाकर 130 रुपए महीने में 200 फ्री टू एयर चैनल्स देखने को मिलेंगे। पहले 130 रुपए में 100 चैनल ही मिलते थे और उस पर टैक्स अलग से लगता था जिसके बाद यह खर्च 153 रुपए हो जाता था। इसका मतलब है कि यूजर के अब हर महीने 23 रुपए सीधे बचेंगे। वहीं दूसरा स्लैब 160 रुपए महीने का है जिसमें 200 चैनल्स मिलेंगे।

- पहले ग्राहकों को 100 चैनल्स के लिए 130 रुपए और 18 प्रतिशत टैक्स देना होता था साथ ही हर 25 चैनल्स के लिए 20 रुपए जुड़ जाते थे।

- इसके अलावा नए नियमों में यह साफ हो गया है कि फ्री टू एयर चैनल्स में वो चैनल्स भी शामिल हैं जो सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने अनिवार्य किए हैं। इनमें दूरदर्शन के चैनल्स शामिल हैं जिनकी संख्या 26 है। लेकिन इनके लिए कोई चार्ज नहीं लिया जा सकेगा।

- केबल ऑपरेटर इन फ्री टू एयर चैनल्स के लिए 160 रुपए महीने से ज्यादा नहीं ले सकता।

- इसके अलावा ट्राई ने वितरण प्लेटफार्म परिचालकों (डीपीओ) को लंबी अवधि यानी छह महीने अथवा अधिक के सब्सक्रिप्शन पर रियायत देने की भी अनुमति दे दी है। इसके बाद लंबी अवधि के लिए DTH रिचार्ज करवाने पर कम पैसे देने होंगे।

- संशोधन के बाद TRAI ने ब्रॉडकास्टर द्वारा ऑफर किए जाने वाले बुके में चैनल्स की कीमत में 7 रुपए की कमी के लिए कहा है। इसका मतलब अगर कोई चैनल बुके में ऑफर किया जा रहा है तो उसकी कीमत 12 रुपए महीने से अधिक नहीं होनी चाहिए। वर्तमान में कुछ चैनल्स का खर्च 19 रुपए महीना तक है।

- ट्राई ने बुके पर भी नियम दिए हैं और इसके बाद बुके पर मिलने वाला डिस्काउंट 33 प्रतिशत तक होगा। इसमें पहला नियम यह है कि आ-ला-कार्ट चैनल का बुके में चार्ज पूरे बुके का डेढ़ गुना से ज्यादा नहीं हो सकता। इसका मतलब है कि अगर ब्रॉडकास्टर 10 चैनल का बुके 100 रुपए महीने में ऑफर कर रहा है तो उसके सभी चैनल्स की एमआरपी 150 रुपए से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

- वहीं दूसरी शर्त कहती है कि किसी भी आ-ला-कार्ट चैनल का चार्ज बुके में शामिल किसी भी चैनल के औसत चार्ज से तीन गुना से अधिक नहीं हो सकता। उदाहरण के लिए, अगर किसी बुके में चैनल का औसत चार्ज 3 रुपए(बुके प्राइज की एमआरपी को इसमें शामिल कुल चैनलों की सख्या से डिवाइड करने पर) है तो किसी भी चैनल का बुके में व्यक्तिगत चार्ज 9 रुपए से ज्यादा नहीं हो सकता।

- इन शर्तों के साथ ब्रॉडकास्टर्स के लिए यह मुश्किल होगा कि वो 12 रुपए के चैनल को 50 पैसे या 1 रुपए वाले चैनल के साथ बुके में रख सके।

- पहले ब्रॉडकास्टर्स अपने ग्राहकों को बुके पर 35-55 प्रतिशत का डिस्काउंट ऑफर कर रहे थे। इसी वजह से अलग-अलग चैनल्स की बजाय बुके में चैनल चुनना सस्ता पड़ रहा था। मसलन जहां स्टार और सोनी जैसे पैक्स की कुल कीमत 30-50 रुपए के बीच थी जबकि अलग से एक चैनल ही 19 रुपए का था।

- ट्राई ने ब्रॉडकास्टर्स को उसके द्वारा दिए जा रहे चैनल्स के अनुसार बुके बनाने के लिए कहा है। इसके बाद अब अगर कोई ब्रॉडकास्टर 12 चैनल्स ही ऑफर कर रहा है तो वो इतने ही बुके भी बना सकेगा। इससे ज्यादा नहीं।

- एक घर में एक से ज्यादा कनेक्शन्स को लेकर भी ट्राई ने बड़ा फैसला किया है और इसके बाद अब मल्टी कनेक्शन के लिए लगने वाला चार्ज 40 प्रतिशत पर फ्रज कर दिया गया है। अब तक कंपनियां हर कनेक्शन के लिए समान चार्ज लेती थीं।

Posted By: Ajay Barve

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