नई दिल्ली। माइक्रोब्लॉलिंग साइट Twitter ने फर्जी न्यूज अकाउंट्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। खबर है कि 6 देशों में 10 हजार से ज्यादा फेक न्यूज अकाउंट बंद कर दिए हैं। इन अकाउंट्स के जरिए गलत सूचनाएं प्रसारित की जा रही थीं। जिन अकाउंट्स पर यह गाज गिरी है, उनमें इनमें सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के करीबी ऊद अल खातनी का Twitter अकाउंट भी शामिल है।

Twitter ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर बताया कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और मिस्त्र के 273 अकाउंट्स को बंद कर दिया गया है। इनके जरिये कतर और ईरान जैसे देशों को निशाना बनाया जा रहा था। साथ ही इनके जरिये सऊदी सरकार के समर्थन में संदेशों का प्रसार किया जा रहा था।

Twitter को सबूत मिले थे कि इन अकाउंट्स को यूएई और मिस्त्र से संचालित हो रही एक निजी टेक्नोलॉजी कंपनी 'डॉटदेव' ने बनाया था और वह ही इन्हें संचालित कर रही थी। Twitter ने 'डॉटदेव' और उससे जुड़े सभी अकाउंट्स को स्थायी रूप से बंद कर दिया है। साथ ही कंपनी ने सिर्फ यूएई से चल रहे 4,248 अकाउंट्स के एक अलग ग्रुप को भी निलंबित कर दिया है। इन अकाउंट्स के जरिए कतर और यमन को निशाना बनाया जाता था।

फर्जी अकाउंट्स से हो रहे थे ऐसे-ऐसे काम

  • Twitter के मुताबिक, इन अकाउंट्स पर अक्सर झूठे व्यक्तियों को नियुक्त किया जाता था और यमन सिविल वार और हाउती आंदोलन जैसे क्षेत्रीय मसलों के बारे में ट्वीट किए जाते थे। जांच में 6 अकाउंट के एक छोटे ग्रुप का भी पता चला जो सऊदी अरब के सरकारी मीडिया से जुड़ा था और सऊदी सरकार के पक्ष में संदेशों का प्रसार करता था। यह समूह खुद को स्वतंत्र पत्रकार के रूप में पेश करता था।
  • अगस्त में Twitter ने चीन में 2 लाख से ज्यादा ऐसे फर्जी अकाउंट्स के नेटवर्क की पहचान की थी जो हांगकांग में विरोध प्रदर्शन के बारे में कलह के बीज बोने की कोशिश कर रहे थे।
  • Twitter ने स्पेन में भी 265 अकाउंट्स बंद कर दिए जो गलत तरीके से लोगों की भावनाएं भड़का रहे थे। स्पेन में 259 और इक्वाडोर के सत्तारूढ़ गठबंधन से जुड़े 1,019 अकाउंट भी बंद कर दिए गए हैं। मालूम हो कि पिछले साल अक्टूबर में Twitter ने रूस से संचालित हो रहे 4,500 अकाउंट्स को बंद कर दिया था।

फेसबुक ने भी ऐप पर की कार्रवाई

इस बीच फेसबुक ने शुक्रवार को बताया कि उसने अपने सोशल मीडिया नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म पर हजारों ऐप को सस्पेंड कर दिया है। यह कार्रवाई कंपनी की ऐप डेवेलपर जांच का हिस्सा है जो कैंब्रिज एनालिटिका विवाद के जवाब में मार्च, 2018 में प्रारंभ हुई थी। सस्पेंड किए गए ऐप करीब 400 डेवेलपर्स से संबंधित हैं। हालांकि फेसबुक ने साफ किया है कि जरूरी नहीं है कि ये ऐप यूजर्स के लिए कोई खतरा पैदा कर रहे हैं।