कोरोना महामारी और लॉकडाउन की वजह से ज्यादातर कंपनियों का कामकाज ऑनलाइन ही हो रहा है। वर्क फ्रॉम होम का कॉन्सेप्ट इतना पॉपुलर हो गया है कि पॉलिटिक्स हो या आईटी सर्विसेज, बच्चों की पढ़ाई हो या ऑफिस का काम... सब कुछ फोन या कंप्यूटर पर ही हो रहा है। इसमें जूम जैसे ऐप के आने से काफी सुविधा हो गई है, लेकिन इसका नुकसान भी है। अब दिन भर मीटिंग्स का दौर चलता रहता है और इस वजह घर और ऑफिस का फर्क ही खत्म हो गया है। खुद जूम के सीईओ का कहना है कि जूम मीटिंग्स की वजह से वो काफी ज्यादा थक जाते हैं.

ZOOM ऐप को डेवलप करनेवाले और कंपनी के CEO एरिक युआन ने वॉल स्ट्रीट जर्नल सीईओ काउंसिल समिट में खुद कहा कि वो जूम मीटिंग्स से इतना ज्यादा परेशान हो जाते हैं कि उन्हें काफी थकावट होने लगती है। उन्होंने बताया कि, पिछले साल उन्होंने लगातार 19 बैक टू बैक जूम मीटिंग्स की थी। लेकिन इससे होनेवाली थकान को देखते हुए अब वो लगातार जूम मीटिंग्स नहीं लेते।

पिछले साल माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्या नडेला ने भी जूम मीटिंग्स से होने वाली थकावट को लेकर जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि डेली रूटीन के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग काफी अच्छा है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप ऑफिस जाना ही बंद कर दें। नडेला ने इस दौरान ये भी कहा थी कि वर्क फ्रॉम होम के दौरान डिसिप्लिन की काफी ज्यादा जरूरत पड़ती है। यानी आपको ये पता होना चाहिए कि आपको कब काम करना है और कब आराम करना है। उन्होंने कहा था कि एक फिक्स डेली रुटीन फॉलो करना हर किसी के लिए फायदेमंद होता है और आप जल्दी थकते भी नहीं है।

Posted By: Shailendra Kumar

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