रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

ट्रैक मैनों की टीम ने रिफ्लेक्टर जैकेट पहने हुए थे, इसके बावजूद लोको पायलट ने हार्न नहीं बजाया। अगर हार्न बजता तो ट्रैकमैन सतर्क हो जाते। जबकि ये प्रावधान भी है कि जब किसी भी लाइन पर ट्रैकों पर टीम काम करती दिखे तो लोको पॉयलट को हॉर्न बजाना होता है।

इसके चलते ये महज दो माह में ये दूसरी घटना है, जिसमें लोको पॉयलट ने हॉर्न नहीं बजाया और कर्मचारी हादसे के शिकार हो गए।

बता दें कि सरोना कुम्हारी सेक्शन के बीच पुरी गांधी एक्सप्रेस के इंजन से टकरा जाने से टैकमैन नारायण उइके की जान चली गई। इस घटना की प्राथमिक जांच करने के लिए टीम सिग्नल और संकेतक विभाग के अधिकारियों की टीम गठित कर दी गई है। यह टीम जानने की कोशिश करेगी, आखिर क्या कारण थे, जिससे हादसा हुआ। बहरहाल अभी तक यही बात सामने आई है कि शनिवार की रात्रि सवा दो बजे पेट्रोलिंग करते समय मिडिल लाइन पर आ गए थे। जिस वजह से हादसा हो गया था। इस घटना के बाद रेल यूनियन और ट्रैक मैनों की पीड़ है, उनसे दिनभर में चार शिफ्ट में ड्यूटी कराया जा रहा है। ऐसे में उनको आराम नहीं मिल पाता है। उन्होंने बताया कि जब ट्रैकमैन रिफ्लेक्टर पहने हुए था, इसके बावजूद रेल के लोको पायलट ने हार्न नहीं बजाया। इस घटना को लेकर ट्रैक मैनों में आक्रोश है, उनका कहना है कि जब वह कोई शिकायत करते हैं, उनका ट्रांसफर कर दिया जाता है। इसके डर के वजह से वह शिकायत करने नहीं करते। बहरहाल, बीते दो माह में दूसरी घटना के बाद मंडल रेलवे पूरे प्रकरण की जांच कराएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network