रायपुर नईदुनिया प्रतिनिधि।

सतर्क रहिए जनाब, अगर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन पर दोपहर एक से तीन बजे के बीच लोकल या यहीं से बनकर चलने वाली ट्रेन से दुर्ग, बिलासपुर या कोरबा जाने के लिए आए हैं। क्योंकि अन्य ट्रेनों के लिए लाइन क्लीयर करने के खातिर एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनों को उनके रवानगी की टाइमिंग से एक से दो घंटे पूर्व ही खड़ी कर देते हैं।

ऐसे में थोड़ा पहले पहुंचने वाले यात्री एक ट्रैक पर दो ट्रेनों के खड़े होने से घनचक्कर में पड़ जाते हैं। क्योंकि इनके बीच फासले कम भी होते हैं। ऐसे में सही ट्रेन की बोगी समझकर उसी में यात्री बैठ जाते हैं। लेकिन इधर, दूसरी को लूप लाइन से दूसरी लाइन से जरिए रवाना किया जाता है।

ऐसे में कई लोगों की ट्रेनें वहां पहुंचने के बाद भी छूट जाती है। पता चला कि इतवारी जाने वाली ट्रेन के बजाए विशाखापट्टनम की पैसेंजर की बोगी में बैठ गए, इधर टाइमिंग से इतवारी के बोगी में इंजन लगाकर अन्य प्लेटफार्म से रवाना कर दिए। बहरहाल, जो लोग समझ लिए हैं, उनकी ट्रेन तो नहीं छूटती, लेकिन अन्य यात्री जो कभी-कभार रायपुर से दुर्ग या कहीं अन्य जाने के लिए आते हैं, उनके साथ धोखा हो जाता है।

मेनलाइन पर दो ट्रेनों के खड़े करने पर एतराज

भले ही दूसरी लाइन को ट्रेनों को रवाना करने के बदले कम दूरस्थ की ट्रेनों को प्लेटफार्म पर अप या डाउन पर ठहराव देकर, रूट की ओर रवाना कर दिया जाता है। वैसे इसे अक्सर लूप लाइन पर खड़ी किया जाता है। लेकिन कभी-कभार इस तरीके से ठहराव करने से यात्री दिग्भ्रमित हो जाते हैं।

लाइन क्लीयर होने पर दो ट्रेनों के इंजन वैगरह बदलते हैं

यार्ड दूर होने पर सिर्फ गंतव्य तक रवाना करने के लिए ट्रेनों के इंजन में बदलाव करते हैं। इस दौरान खास तौर इतवारी, मेमू सहित अन्य पैसेंजर ट्रेनों की बोगियों की सफाई आदि की जाती है। इसके बाद ट्रेनों को उनके गंतब्य तक रवाना करते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network